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Bareilly News: अव्यवस्था के अंधकार में भी फैला रहे शिक्षा का उजाला

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- नवाचार से विद्यार्थियों की समस्याएं चुटकियों में हल कर रहे शिक्षक, संवार रहे देश का भविष्य
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बरेली। शिक्षक... तीन अक्षर वाले इस शब्द का अर्थ व्यापक है। अव्यवस्था सहित अन्य चुनौतियों से जूझते हुए शिक्षक न केवल शिक्षा का उजाला फैला रहे हैं, बल्कि देश के भविष्य को भी सुरक्षित कर रहे हैं। जिले के कई शिक्षक तकनीक और नवाचारों के सहारे समस्याओं का समाधान कर प्रदेश स्तर पर जिले का मान बढ़ा रहे हैं। इनके प्रति सम्मान जाहिर करने के लिए हर वर्ष पांच सितंबर को डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर ''राष्ट्रीय शिक्षक दिवस'' मनाया जाता है। शिक्षक दिवस पर हम कुछ ऐसे ही शिक्षकों से आपका परिचय करवा रहे हैं जो सही मायने में इस शब्द के अर्थ को चरितार्थ कर रहे हैं....।

सारिका ने बनाई सुपर-30, 11 ने लहराया परचम

उच्च प्राथमिक विद्यालय पथरा की प्रभारी प्रधानाध्यापक सारिका सक्सेना का चयन राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए हुआ है। उन्हें बृहस्पतिवार को सम्मानित किया जाएगा। वह बताती हैं कि खराब आर्थिक स्थिति की वजह से बच्चे कक्षा आठ के बाद आगे की पढ़ाई नहीं कर पाते हैं। इससे निपटने के लिए उन्होंने मेधावी बच्चों को ही सक्षम बनानी की ठानी, ताकि वे स्वयं अपनी पढ़ाई का खर्चा उठा सकें। अतिरिक्त समय देकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ''सुपर-30'' ग्रुप बनाया। राष्ट्रीय आय व योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा में उनके विद्यालय के 11 छात्र-छात्राओं का चयन हो चुका है। विद्यार्थियों की वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के लिए प्रयोग आधारित विज्ञान शिक्षण शुरू किया। इसी का परिणाम रहा कि स्कूल के दो छात्रों का चयन इंस्पायर अवॉर्ड में हुआ। उनके स्कूल में सात गांव के बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से शिक्षण कार्यों का विस्तार करने पर उन्हें राज्य स्तरीय आईसीटी अवाॅर्ड भी मिल चुका है।
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मंदिर में शिक्षा के दीप जला रहीं ज्योतिक्यारा ब्लॉक के खजुआई गांव की ज्योति ठाकुर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को पढ़ाती हैं। वह बताती हैं कि उनके परिवार में किसी ने भी उच्च शिक्षा हासिल नहीं की है। यह बात ज्योति के मन को कचोटती थी। 12वीं पास करने के बाद ही उन्होंने गांव से तीन किलोमीटर दूर करेली गांव के मंदिर परिसर में 150 बच्चों को रोज दो घंटे पढ़ाना शुरू कर दिया। बच्चे रोजाना पढ़ने आएं, इसके लिए उन्होंने टाइम टेबल भी बना रखा है। रविवार को वह केवल मौखिक कक्षाएं लगाती हैं और शनिवार को खेल की शिक्षा देती हैं। उन्होंने इस नवाचार का नाम संस्कार निशुल्क शिक्षा केंद्र रखा है। उनकी इस लगन को देखते हुए शहर के समाजसेवी भी बच्चों को स्टेशनरी मुहैया कराने लगे हैं। इस कवायद के बीच ही आर्थिक बाधाओं को पार करते हुए उन्होंने उच्च शिक्षा भी हासिल की।


बच्चों को गणित में माहिर बना रहे जाकिरप्राथमिक विद्यालय हरुनगला द्वितीय के प्रधानाध्यापक जाकिर हुसैन कम संसाधनों में बच्चों को बेहतर शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। 175 विद्यार्थियों पर अकेले शिक्षक होने के बावजूद भी वह नवाचार से गणित जैसे विषय को खेल-खेल में बच्चों को समझा रहे हैं। इसके लिए उन्होंने खुद यूनिक मॉडल तैयार किए हैं। वह बच्चों के बीच दरी पर बैठकर उन्हें पढ़ाते हैं। वह अब तक 200 टीएलएम (शिक्षण अधिगम सामग्री) बना चुके हैं। इस पर उनकी किताब भी प्रकाशित होने वाली है। सोशल मीडिया पर भी देश-विदेश के लोग इनके पढ़ाने के तरीके के कायल हैं। यूट्यूब पर उनके 16 हजार सब्सक्राइबर हैं। वह बच्चों को प्रयोगात्मक रूप से पढ़ाने पर भरोसा करते हैं। उन्हें टीएलएम मॉडल किंग के नाम से भी पुकारते हैं।
वेतन के रुपयों से बनवा दिया बैडमिंटन कोट

बिथरी चैनपुर के उच्च प्राथमिक विद्यालय चावड़ की सहायक अध्यापिका रीटा बत्रा का मानना है कि विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई के साथ ही खेल भी बहुत जरूरी है। खेल के प्रति बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए उन्होंने अपने वेतन से करीब एक लाख रुपये खर्च कर विद्यालय परिसर में बैडमिंटन कोर्ट बनवाया है। यहां बच्चों के लिए रोजाना खेल का पीरियड लगाया जाता है, जिसमें वे बैडमिंटन का अभ्यास करते हैं। रीटा कहती हैं कि उन्हें खेल और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए उनके पति बैडमिंटन खिलाड़ी मृदुल कुमार ने प्रेरित किया।



अमर की आवाज से वाकिफ हैं प्रदेशभर के बच्चेउच्च प्राथमिक विद्यालय फतेहगंज पश्चिमी में तैनात सहायक अध्यापक अमर कुमार द्विवेदी की आवाज से प्रदेशभर के बच्चे वाकिफ हैं। उन्होंने कक्षा छह की पुस्तक ''महान व्यक्तित्व'' की पांच कहानियों को अपनी आवाज में डब किया है। इसे राज्य शैक्षिक अनुसंधान व प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने दीक्षा एप पर अपलोड किया है। बच्चे किताब में छपे क्यूआर कोड को स्कैन कर इन कहानियों को सुन सकते हैं। उन्होंने एकलव्य, राजा हरिश्चंद्र, महर्षि, अपराजिता आदि कहानियों को उन्होंने डब किया है। सुरक्षा एवं संरक्षा मॉड्यूल के लिए उन्होंने शॉर्ट फिल्म तैयार की है। इसमें उन्होंने अभिनय भी किया है। निष्प्रयोज्य वस्तुओं से संबंधित कलाकारी पर एक शैक्षिक वीडियो भी तैयार किया है। दीक्षा एप पर इस वीडियो के माध्यम से प्रदेश भर के शिक्षक प्रशिक्षण ले रहे हैं।


बच्चों को भा रही रुचि की सरगमविकास क्षेत्र नवाबगंज के कंपोजिट विद्यालय पीतांबरपुर की प्रभारी प्रधानाध्यापक रुचि शर्मा ग्रामीण बच्चों को पढ़ाई के साथ संगीत भी सिखाती हैं। उनके इस प्रयास से विद्यार्थी रोजाना विद्यालय पहुंचते हैं। गायन-वादन सिखाने के लिए स्कूल में वाद्य यंत्र भी उपलब्ध हैं। बच्चों को संगीत में निपुण करने के लिए उन्होंने खुद इसका कोर्स किया। ब्लॉक व जनपद स्तरीय कार्यक्रमों में भी स्कूल के बच्चों ने कई मुकाम हासिल किए हैं। बेसिक शिक्षकों की ओर से बनाई गई फिल्म ''सरजी'' में छठ पर्व का गीत रुचि शर्मा ने गाया है। लोकसभा चुनाव में उनका मतदाता जागरूकता गीत जिलाधिकारी की ओर से जिला स्तर पर प्रचार के लिए चुना गया था। इस वर्ष राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए इनका नाम जिले से भेजा गया है।
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संसाधनों की कमी से जूझ रहे शिक्षक

जिले के परिषदीय विद्यालयों में संसाधनोंं का अभाव है। विभिन्न सरकारी योजनाओं व कार्यक्रमों में उनकी ड्यूटी लगा दी जाती है। जहां एकल शिक्षक हैं, वहां की व्यवस्था चौपट हो रही है। एकमात्र शिक्षक ऑनलाइन डाटा फीडिंग, शिक्षा अभियान, नामांकन, प्रवेश आदि में उलझ जाता है। नगर क्षेत्र के विद्यालयों की स्थिति और भी दयनीय है। प्राथमिक विद्यालय सिठौरा, सनैय्या धनसिंह, पीर बहोड़ा, हरुनगला, मठ लक्ष्मीपुर, उच्च प्राथमिक विद्यालय रहपुरा चौधरी में शिक्षकों की कमी है। कई स्कूल सिर्फ शिक्षामित्र के सहारे संचालित किए जा रहे हैं। वहीं, जिले में कई ऐसे स्कूल भी हैं, जहां विद्यार्थियों की संख्या के सापेक्ष अधिक शिक्षक हैं। कई बार इनके समायोजन की मांग उठ चुकी है, लेकिन अफसर चुप्पी साधे हुए हैं। फिलहाल, इन चुनौतियों से जूझते हुए शिक्षक देश का भविष्य संवारने में जुटे हुए हैं। संवाद
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