बदायूं। सपा नेता एवं पूर्व जिला पंचायत सदस्य राकेश गुप्ता को कई साल से हमले का डर सता रहा था। इससे वह अपने साथ निजी गनर रखते थे, जो हर समय उनके साथ असलहे लेकर तैयार रहते थे, लेकिन हत्या के दौरान गनर घर पर मौजूद नहीं थे। उनका छोटा भाई गनर अपने साथ ले गया था।
बसपा शासन काल में राकेश गुप्ता का अच्छा नाम था। बाद में सपा सरकार में भी नाम रहा। उन्होंने राजनीति में अपनी पहचान बनाई। इसके साथ ही उनके दुश्मन भी पैदा हो गए। जब उनके भाई की हत्या हुई, तब उन्हें लगने लगा कि उनकी जान को भी खतरा है। इससे वह निजी गनर रखने लगे थे। कुछ और भी लोग उनके साथ असलहे लेकर मौजूद रहते थे। जब वह घर में चले जाते थे, तब गनर अपने घर जाते थे।
बताते हैं कि उनके अलावा छोटे भाई राजेश गुप्ता को भी हमले का डर था। वह भी कभी अकेले नहीं आते-जाते थे। एक-दो लोग असलहा लेकर उनके साथ भी रहते थे। बताया जाता है कि सोमवार शाम जब राकेश गुप्ता घर के अंदर जाकर लेट गए, तब उनके छोटा भाई राजेश गनर अपने साथ ले गए। उन्हें राकेश गुप्ता की चिंता थी, इससे उन्होंने कॉल की थी। जब कॉल रिसीव नहीं हुई तो एक व्यक्ति को घर भेजा गया, तब उन्हें तिहरे हत्याकांड का पता चला।