बरेली। पितृ पक्ष में लोग पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध और तर्पण आदि करते हैं। वहीं, कई लोग ऐसे भी हैं जो अपने जीवित माता-पिता से मुंह मोड़ रहे हैं।
बुखारा मोड़ पर समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित वृद्ध आश्रम में मिली महिला ने बताया कि उनका बेटा करोड़पति है, लेकिन मां को रखने के लिए उसके घर में जगह नहीं है। इसीलिए वह वृद्ध आश्रम में रह रही हैं।
मूलरूप से शहर के एक मोहल्ले की रहने वाली महिला ने बताया कि उनकी एक बेटी और एक बेटा है। दोनों की शादी हो चुकी है। बेटी का पति सरकारी कर्मचारी है। बेटा एक कस्बे में किराने के सामानों का थोक व्यापारी है।
पति की मौत के बाद वह शहर में बेटी के साथ रह रही थीं। चार माह पहले बेटी ने उन्हें रखने से इन्कार कर दिया तो वह बेटे के पास पहुंचीं तो उसने घर में जगह न होने का हवाला देते हुए उन्हें रखने से इन्कार कर दिया। इस पर वह वृद्ध आश्रम में आकर रहने लगीं। इतनी बातें कहते-कहते उनकी आंखें नम हो गईं।
वृद्ध आश्रम में छोड़ गया बेटा : शाहजहांपुर निवासी वृद्ध अपनों के होते हुए भी बेघर हैं। उन्होंने बताया कि उनका पूरा परिवार शाहजहांपुर में ही रह रहा है। उनके तीन बेटे थे। सबसे छोटे बेटे की मौत हो चुकी है।
कोरोना महामारी के दौरान मझला बेटा उन्हें वृद्ध आश्रम में छोड़ गया था। कुछ दिनों तक वह उनसे मिलने आता रहा, बाद में उसकी भी मौत हो गई। उसके बाद उन्हें देखने कोई नहीं आया। अब वह भी उन्हें भूल चुके हैं। अब उन्हें यह भी नहीं पता है कि उनके परिजन किस हाल में हैं और क्या कर रहे हैं? संवाद