बरेली। मॉडल टाउन स्थित श्री गुरुनानक इंटर कॉलेज की प्रबंध समिति सितंबर से भंग है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी डीआईओएस कार्यालय इसे बहाल नहीं कर रहा है। प्रबंधक सुरजीत सिंह का आरोप है कि भूमाफिया, शराब कारोबारी और एक अन्य रसूखदार के इशारे पर अफसर उन्हें चक्कर लगवा रहे हैं। आरोप है कि ये लोग प्रबंध समिति में घुसपैठ कर विद्यालय की बेशकीमती जमीन पर कब्जा करने की फिराक में हैं। विभाग ने यदि रवैया नहीं बदला तो वह मुख्यमंत्री से इसकी शिकायत करेंगे।
सुरजीत सिंह ने बताया कि विभाग की ओर से सार्वजनिक सूचना जारी की गई थी कि जिन विद्यालयों की प्रबंध समिति नहीं गठित हुई है, वे 20 मार्च 2021 तक सूचना दे दें। इसके बाद पर्यवेक्षक की उपस्थिति में चुनाव कराया जाएगा। विद्यालय की ओर से 18 मार्च 2021 को इसकी सूचना देते हुए पर्यवेक्षक भेजने की गुजारिश की। सूचित की गई तारीख को चुनाव तो हुआ पर विभाग की ओर से पर्यवेक्षक नहीं भेजा गया। इस पर विभाग ने कहा कि पर्यवेक्षक की अनुपस्थिति में हुआ चुनाव अवैध माना जाएगा। दोबारा चुनाव कराएं। आठ अप्रैल 2021 को पर्यवेक्षक की मौजूदगी में चुनाव कराया गया और 12 अप्रैल को इसे मान्यता मिल गई।
चक्कर पर चक्कर लगवा रहे अफसर
प्रबंध समिति के गठन के बाद 15 जून 2021 को मॉडल टाउन निवासी एक रसूखदार ने विभाग को पत्र भेजा कि उन्हें चुनाव की सूचना नहीं दी गई। इस पर डीआईओएस कार्यालय से 16 जून को उन्हें पत्र भेजकर 18 जून तक जवाब देने को कहा गया। उन्हाेंने जवाब दाखिल किया, फिर भी कमेटी भंग कर दी गई। उन्हाेंने संयुक्त शिक्षा निदेशक के यहां अपील की। महीने भर कोई जवाब नहीं आया तो वह हाईकोर्ट चले गए। वहां से फैसला उनके पक्ष में हुआ तो तीन सितंबर को कमेटी बहाल कर दी गई। इसके बाद कुछ लोगों की शिकायत पर नौ सितंबर 2021 को फिर समिति भंग कर दी गई। वह हाईकोर्ट गए तो कोर्ट ने तीन महीने में फैसला करने के आदेश दिए। तीन माह की अवधि बीतने के बाद भी विभाग के अफसर कोई फैसला नहीं ले पाए हैं।
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चुनाव गलत तरीके से हुआ था, इसलिए पहले समिति भंग की गई। अब भी समिति में आपसी विवाद चल रहा है। आंतरिक विवादों का समाधान होने के बाद मामले का निस्तारण किया जाएगा। तब तक के लिए समिति भंग की गई है।
- सोमारू प्रधान, डीआईओएस
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1952 में हुई थी विद्यालय की स्थापना
प्रबंधक सुरजीत सिंह ने बताया कि 1952 में विद्यालय की स्थापना हुई थी। 1959 में कमेटी गठित हुई और 1960 में हाईस्कूल और 1963 में इंटरमीडिएट की मान्यता मिली। अब स्थिति यह है कि विद्यालय में सात साल से कार्यवाहक प्रधानाचार्य हैं।