बरेली। स्क्रब टाइफस और लेप्टोस्पायरोसिस जैसे घातक रोग चूहे-छछूंदर की वजह से होते हैं। इनको नियंत्रित करने के लिए कृषि विभाग अब सांप, बिल्ली, लोमड़ी, बाज और चमगादड़ के संरक्षण के प्रति जागरूक करेगा।
विशेष संचारी रोग नियंत्रण मुहिम एक अप्रैल से शुरू हो गई है। कृषि निदेशालय से जारी माइक्रोप्लान के तहत कृषि विभाग स्क्रब टाइफस और लेप्टोस्पायरोसिस के प्रति लोगों को जागरूक करेगा। कृषि निदेशक डॉ. जितेंद्र कुमार तोमर की ओर से जारी दिशानिर्देश में कहा गया है कि चूहों के प्राकृतिक शत्रु बिल्ली, सांप, उल्लू, लोमड़ी, चमगादड़ और बाज का संरक्षण किया जाए। ऐसे में घर, खेत-खलिहान के आसपास अगर ये प्राणी मौजूद हैं तो उन्हें मारे नहीं। चूहों को भगाने में ये सहयोगी साबित होंगे।
पक्के या धातु से बने बखारी में रखें अनाज
चूहों की संख्या नियंत्रण के लिए अन्न भंडारण पक्के या धातु से बने पात्र या बखारी में करने को कहा है। साथ ही, ब्रोमोडियोलान 0.005 फीसदी या एल्युमिनियम फॉस्फाइड दवा से बना चारा चूहों के बिल पर रखें। इसे खाकर चूहे मर जाएंगे। चूहेदानी का प्रयोग करने को कहा है।
काट रहे चूहे-छछूंदर, लगवा रहे वैक्सीन
तीन सौ बेड अस्पताल स्थित रैबीज क्लीनिक प्रभारी डॉ. वैभव के मुताबिक बीते वर्ष से चूहे और छछूंदर के काटने के बाद लोग एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे हैं। हर दिन एक-दो केस पहुंच रहे हैं। बीते साल करीब सौ लोगों को चूहे और छछूंदरों ने काटा था। इसमें ज्यादातर किसान और कुछ लोग पुराना शहर, कालीबाड़ी, बाकरगंज के रहने वाले थे।