बरेली। टेंडर निरस्त होने की संस्तुति के बाद उसके अनुमोदन में लोक निर्माण विभाग के अधिकारी हीलाहवाली कर रहे हैं। एसई अभिनेष कुमार के कार्यालय से चीफ इंजीनियर के दफ्तर की दूरी मात्र 200 मीटर है, लेकिन 24 घंटे में भी संबंधित पत्र चीफ इंजीनियर के कार्यालय तक पहुंच सका है। इसलिए मामला अटका हुआ है।
27 करोड़ का टेंडर हासिल करने के लिए एक फर्म ने फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र लगाया था। सेतु निगम के शाहजहांपुर के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने इस बारे में त्रुटि स्वीकारी थी, लेकिन जांच के दौरान संबंधित फर्म को ज्यादा जिम्मेदार माना गया। फर्म की जमानत राशि जब्त करते हुए उसे काली सूची में डाले जाने की संस्तुति की गई। एसई ने मंगलवार दोपहर पत्र भेज दिया था। यह पत्र बुधवार दोपहर ढाई बजे तक चीफ इंजीनियर तक नहीं पहुंचा। इसलिए कार्रवाई अटक गई।
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जांच समिति की संस्तुति प्राप्त हो जाती तो उसका परीक्षण करते हुए टेंडर को निरस्त करते हुए अग्रिम कार्रवाई की जा सकती थी।
- संजय तिवारी, मुख्य अभियंता, लोक निर्माण विभाग
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फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर भोजीपुरा-अगरास मार्ग का टेंडर हासिल करने वाली फर्म का टेंडर निरस्त करते हुए 42.3 लाख रुपये की जमानत जब्त कर फर्म को काली सूची में डालने की संस्तुति मैंने मुख्य अभियंता से की है। पत्र कहां पर अटका है, इसे चेक कराएंगे। - अभिनेष कुमार, अधीक्षण अभियंता, लोक निर्माण विभाग