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ट्रेनों का हाल: स्लीपर में सामान्य बोगी जैसे हालात, गैलरी में गुजारी रात, टॉयलेट में खड़े-खड़े किया सफर

Tue, 30 May 2023 09:57 AM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

गर्मी की छुट्टियों के चलते ट्रेनों में यात्रियों का दबाव बढ़ गया है। स्लीपर कोच में सामान्य बोगी जैसे हालात हैं, जिससे ट्रेन के सफर में यात्रियों के पसीने छूट रहे हैं। कई यात्री टॉयलेट में खड़े खड़े यात्रा करने को मजबूर हैं। 
 
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स्लीपर कोच की गैलरी में लेटे बच्चे, बैठे यात्री - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गर्मी की छुट्टियों में ट्रेनों पर यात्रियों का दबाव काफी बढ़ा हुआ है। हालात ये हैं कि बरेली होकर गुजरने वाली लंबी दूरी की ज्यादातर ट्रेनों में 20 जून तक क्षमता से 35 फीसदी तक ज्यादा टिकट बुक हैं। स्पेशल ट्रेनों में भी कंफर्म टिकट नहीं मिल रहे हैं। यात्रा के दिन तक वेटिंग टिकटों में बमुश्किल पांच से सात फीसदी टिकट भी कंफर्म नहीं हो पा रहे। सोमवार रात कई ट्रेनों में वेटिंग टिकट वाले यात्री कोच में सीटों के नीचे फर्श पर बैठकर और गैलरी में लेटकर यात्रा करते नजर आए। कई तो टॉयलेट में खड़े खड़े यात्रा करने को मजबूर रहे।

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बरेली जंक्शन से होकर रोजाना अप-डाउन औसतन 80 से 90 ट्रेनें गुजरती हैं। लंबी दूरी की ज्यादातर ट्रेनों में स्लीपर के मुकाबले एसी कोच ज्यादा हैं। जंक्शन से रोजाना औसतन 25 से 30 हजार यात्री आते-जाते हैं। छुट्टियों का सीजन शुरू होने के साथ मई के पहले सप्ताह से ही ट्रेनों में भीड़ बढ़ने लगी थी। अब हालात ये हैं कि जनरल कोच को छोड़ भी दें तो आरक्षित स्लीपर कोचों में भी भीड़ के कारण यात्रियों का चढ़ना मुश्किल हो रहा है।

मुरादाबाद डिवीजन के कंट्रोल रूम को रोजाना कोच में क्षमता से अधिक और भीड़ के कारण टॉयलेट का दरवाजा बंद होने जैसी आठ से दस शिकायतें मिल रही हैं। कंफर्म टिकट के अलावा ज्यादातर यात्री वेटिंग टिकट के होने के कारण उनको कोच से उतारा भी नहीं जा सकता। लंबी दूरी की कई ट्रेनों में जुलाई के पहले सप्ताह तक वेटिंग आ रही है।

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वेटिंग टिकटों से रेलवे को हो रही कमाई

रेलवे को वेटिंग टिकटों से खूब कमाई हो रही है। अगर कोई यात्री वेटिंग टिकट को निरस्त कराता है तो उसको मिलने वाले रिफंड में रेलवे कटौती करता है। स्लीपर क्लास में 60 और एसी श्रेणी में 70 रुपये तक कटौती के बाद यात्री को रिफंड दिया जाता है। काउंटर टिकट निरस्त कराने के लिए लाइन में लगने के स्थान पर यात्री वेटिंग टिकट पर ही कोच में भारी भीड़ के बीच यात्रा करने के लिए मजबूर होते हैं। इस कारण महिलाओं और बच्चों को ज्यादा समस्या होती है।

ट्रेन के लगेज कोच में बैठे यात्री - फोटो : अमर उजाला

स्लीपर कोच में 72 सीट, यात्री 250

लंबी दूरी की ज्यादातर 22 कोच की ट्रेन में स्लीपर श्रेणी के 10 से 12 कोच होते हैं। एक स्लीपर कोच में 72 सीट होती हैं। अगर वेटिंग टिकट के गणित को समझें तो स्लीपर कोच में 200-250 तक वेटिंग टिकट जारी किए जा सकते हैं। इसी तरह एसी थ्री में 100, टू में 50 और एसी वन में 20 तक वेटिंग टिकट जारी किए जाने की व्यवस्था है। स्लीपर श्रेणी के मुकाबले एसी श्रेणी के कोचों में सीटों की संख्या कम होती है। यहां भी वेटिंग टिकटों के कारण कोच यात्रियों से भरे रहते हैं। इस कारण कंफर्म टिकट पर यात्रा करने वाले यात्रियों को भी काफी समस्या होती है।

केस- एक
कोलकाता से जम्मूतवी जाने वाली 13151 जम्मूतवी एक्सप्रेस के स्लीपर क्लास एस-3 के यात्री सुजित कुमार ने सोमवार को कांट्रोल रूम में शिकायत दर्ज कराई कि उनका स्लीपर क्लास कोच जनरल क्लास बन गया है। इससे उनको परेशानी हो रही है। कोच की गैलरी और टॉयलेट तक यात्री खड़े हैं। टॉयलेट जाने में भी समस्या हो रही है।

केस- दो
15128 काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस के एस-5 स्लीपर कोच में यात्रा कर रहे अनिल नाम के यात्री ने रेलवे पर तंज कसते हुए शिकायत दर्ज कराई कि उनको कोच आरक्षित है या फिर जनरल भीड़ की वजह से यही समझ नहीं आ रहा। कोच में क्षमता से तीन-चार गुना ज्यादा यात्री हैं। इससे महिला यात्रियों को काफी दिक्कतें हो रही हैं।
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इन ट्रेनों में लंबी वेटिंग- 15119/20 बनारस-देहरादून एक्सप्रेस 12369/70 हावड़ा-देहरादून एक्सप्रेस 15011/12 लखनऊ-चंडीगढ़ एक्सप्रेस 15127/28 काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस 15035/36 काठगोदाम-नई दिल्ली एक्सप्रेस 15043/44 काठगोदाम-लखनऊ एक्सप्रेस 12203/44 सहरसा-अमृतसर एक्सप्रेस 22541/42 आनंद विहार-बनारस गरीब रथ एक्सप्रेस 12331/32 हावड़ा-जम्मूतवी हिमगिरी एक्सप्रेस 15653/54 गुवाहटी-जम्मूतवी अमरनाथ एक्सप्रेस

वरिष्ठ वाणिज्य मंडल प्रबंधक सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि छुट्टियों और समर सीजन में यात्रियों की भीड़ को देखते हुए समर स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। लंबी दूरी की ट्रेनों में कोच भी बढ़ाए गए हैं। यात्रियों की सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। 
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