बरेली। स्पोर्ट्स स्टेडियम में भले ही सिंथेटिक ट्रैक बनाने का काम चल रहा हो और सुविधाएं देने की बात भी कही जा रही हो, लेकिन इसमें करीब एक साल का समय लगेगा। स्टेडियम में ट्रैक और कोच की ये परेशानी कई सालों से बनी हुई है। वहीं दूसरी ओर खिलाड़ियों के हौसले पस्त नहीं हुए हैं। उन्होंने रिठौरा स्थित आदेश नगर में खुद का ट्रैक बना लिया है।
पिछले दो-तीन सालों से खिलाड़ी वहां पर जिला एथलेटिक्स संघ के सचिव साहिबे आलम के नेतृत्व में अभ्यास कर रहे हैं। सुविधाएं नहीं हैं फिर भी राज्य व राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में उनका चयन हो रहा है। जिले व प्रदेश को पदक भी दिला रहे हैं। रिठौरा की इस भूमि ने कई अग्निवीर और पुलिस के जवान भी देश को दिए हैं। हालांकि रोहिलखंड यूनिवर्सिटी में ट्रैक है, लेकिन कोच नहीं होने से खिलाड़ी रिठौरा के आदेश नगर की ओर ही अपना रुख कर रहे हैं।
- अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर इन्होंने लहराया परचम
जिला एथलेटिक्स संघ के सचिव साहिबे आलम ने मास्टर एशियन गेम्स में चार स्वर्ण पदक जीते हैं। वह इस समय नेशनल टेक्निकल क्वालीफाई एथलीट हैं। वह साउथ एशियन गेम्स, एशिया ट्रैक एंड फील्ड मीट, आईटीसी इंटरनेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप, कॉमनवेल्थ गेम्स और राष्ट्रीय प्रतियोगिता में ऑफिशियल के रूप में प्रतिभाग करते हैं। इसके अलावा कुशाल सिंह नेगी अंतरराष्ट्रीय एशिया क्रॉस कंट्री चैंपियनशिप के रजत पदक विजेता हैं। नवीन चौधरी ने ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी में चार स्वर्ण, हेमा ने 400 मीटर में रजत, संतोषी खड़ावत ने सीनियर नेशनल में रजत और गीतिका ने शॉट पुट में कांस्य पदक हासिल किया है।
- सेना व पुलिस में भी दे रहे सेवाएं
वर्ष 2023 में ऑल इंडिया क्रॉस कंट्री में रजत पदक हासिल करने वाली काजल और कांस्य पदक लेने वाले मोहम्मद अलीम पुलिस में सेवाएं दे रहे हैं। इनके अलावा मिजामुद्दीन, मुनीश, अनीस मंसूरी, आसिब, वसीम, अकरम, देवेश गोले, रंजीत, शील, रतन अग्निवीर के तहत फौज में सेवाएं दे रहे हैं।
- ये हैं मौजूदा राष्ट्रीय खिलाड़ी
इंडिया कैंप कर चुके कादर खान समेत अनिकेत, इमरान, मो. अरबाज, मीत सिंह गिल, श्लोक व ऋषभ मौजूदा राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हैं। ये खिलाड़ी भी रिठौरा में पिछले डेढ़ साल से रहकर अभ्यास कर रहे हैं।
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खिलाड़ियों से बातचीत...
फोटो...
- रूम लेकर रिठौरा में रहकर प्रैक्टिस कर रहा हूं। शहर में बने स्पोर्ट्स स्टेडियम में कोच मिलें तो सभी खिलाड़ी वहां जाएं, लेकिन सालों से कोच नहीं है। खिलाड़ी सुविधाओं के भूखे नहीं होते, लेकिन सही मार्ग दर्शन मिलना जरूरी है।
मनोज गंगवार, निवासी, भुता
- छह किमी से रोज प्रैक्टिस करने रिठौरा जाते हैं, राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं खेल चुके हैं। स्टेडियम में ट्रैक बनने के साथ कोच मिल जाए तो कई खिलाड़ियों को आसानी हो।
मोईनुद्दीन, निवासी, डोहरिया
वर्जन...
ट्रैक बनने में करीब एक साल लगेगा, जब ट्रैक बनवाया जा रहा है तो निश्चित तौर पर कोच भी मिलेगा। खिलाड़ियों को सुविधाएं देने का प्रयास है।
जितेंद्र यादव, आरएसओ