बरेली। चुनावी ड्यूटी कटवाने के लिए विभिन्न विभागों के कर्मचारी अलग-अलग बहाना लेकर पहुंच रहे हैं। महिला कर्मचारी अपने छोटे बच्चों को लेकर पहुंच रहीं हैं तो अन्य कर्मचारी अपनी बीमारी की हिस्ट्री के साथ डाक्टरों के परामर्श संबंधी पर्चे लेकर अफसरों से गुहार लगा रहे हैं। आमतौर पर अधिकारी ड्यूुटी काटने से परहेज कर रहे हैं, लेकिन जिसे गंभीर बीमारी है और मेडिकल बोर्ड उसका सत्यापन कर देता हो तो उसकी ड्यूटी काटी जा रही है।
ड्यटी कटवाने के लिए 26 व 27 अप्रैल को पीठासीन अधिकारी और प्रथम मतदान अधिकारी के पद पर नियुक्त किए गए कर्मचारियों की ओर से 103 प्रार्थना पत्र आए। इसमें 96 कर्मचारियों की ड्यटी काटी गई। कुछ ऐसे थे, जिनकी दो-दो जगह ड्यूटी लग गई थी। मेडिकल बोर्ड के सामने आए कर्मचारियों में कुछ ऐसे थे, जिनकी बहानेबाजी पकड़ी गई तो कार्मिक प्रभारी ने ड्यूटी काटने से इन्कार कर दिया। एक महिला शिक्षक अपने 11 महीने के बच्चे को लेकर पहुंचीं। कहा कि पति भी सर्विस करते हैं। कोई बच्चे को संभालने वाला नहीं है। ऐसे में ड्यूटी काट दी जाए। इस पर अधिकारियों ने कहा कि सास-ससुर या रिश्तेदार के पास बच्चे को छोड़कर जाएं।
एक दिन लेट हुए 47 कर्मियों की अर्जी पर नहीं किया विचार
ड्यूटी कटवाने के लिए 26-27 अप्रैल की तिथि दी गई थी, लेकिन 28 अप्रैल को 47 प्रार्थना पत्र आए। इन प्रार्थना पत्रों पर कार्मिक प्रभारी ने विचार नहीं किया।
डीएम ने बनाया है मेडिकल बोर्ड
जो कर्मचारी खुद को बीमार बताकर ड्यूटी कटवाना चाहते हैं, उनकी सेहत की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड का गठन डीएम ने किया है। बोर्ड विकास भवन के सभागार में शनिवार को दिन भर कर्मचारियों की जांच करता रहा। जब तक पोलिंग पार्टियां रवाना नहीं हो जाती हैं, तब तक यह बोर्ड काम करता रहेगा।