बरेली। शहर में बीडीए की नाक के नीचे नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बीडीए कार्यालय और उपाध्यक्ष के आवास के आसपास ही मानकों को दरकिनार कर बनाए गए बेसमेंट में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। सड़कों पर पार्किंग की वजह से जाम लग रहा है। अब दिल्ली में हुए हादसे के बाद बीडीए के अधिकारियों ने बेसमेंट के खिलाफ कार्रवाई की ढोल पीटनी शुरू कर दी है, पर हकीकत इससे इतर है।
प्रभातनगर में प्राधिकरण के कार्यालय के सामने से उपाध्यक्ष के आवास तक कई बेसमेंट बने हैं। इनमें व्यवसायिक गतिविधियां चल रही हैं। होटल, रेस्टोरेंट, शोरूम से लेकर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स तक बने हुए हैं। यहां दुकानों में भीड़ लगी रहती है। अवैध नक्शे वाले भवनों व उनमें बेतरतीब खुलीं दुकानों की संख्या बढ़ रही है।
कई बेसमेंट में किराए पर दुकान उठाने के लिए बोर्ड तक लगे हैं। बेसमेंट में पार्किंग के स्थान पर व्यावसायिक गतिविधियां होने से वहां आने वाले वाहनों की पार्किंग सड़क पर होती है। इससे इलाके में जाम लगता है। इसके बावजूद प्रवर्तन दस्ते यहां कोई कार्रवाई नहीं करते।
ये हैं मानक
बेसमेंट पार्किंग और स्टोर रूम के लिए इस्तेमाल हो, जिससे आपदा के दौरान जनहानि कम हो। बेसमेंट के दो गेट होने चाहिए। इसमें एक गेट से अंदर और दूसरे गेट से बाहर निकलने का रास्ता होना जरूरी है। अग्निशमन और जलनिकासी की व्यवस्था होनी चाहिए। बीडीए कार्यालय के आसपास बने बेसमेंट इन मानकों पर खरे नहीं उतरते।
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बेसमेंट कई तरह से पास होते हैं। कौन किस कैटेगरी में पास है, इसको दिखवा लेते हैं। अगर अवैध तरीके से बेसमेंट में व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं तो कार्रवाई की जाएगी। - योगेंद्र कुमार, सचिव, बीडीए