बरेली। प्रभातनगर स्थित सोमनाथ मंदिर में अयोध्या से आए सतगुरु शरण महाराज ने दूसरे दिन रविवार को शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग सुनाया। कहा कि भगवान शिव और देवी पार्वती का विवाह प्रेम, तपस्या और भक्ति का प्रतीक है। सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में आत्मदाह कर लिया तो हिमालय के घर पार्वती के रूप में उनका पुनर्जन्म हुआ। पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की। उनकी भक्ति और तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें स्वीकार किया। देवी पार्वती की तपस्या के दौरान देवताओं ने कामदेव को शिवजी का ध्यान भंग करने के लिया भेजा। शिवजी ने अपनी तीसरी आंख खोलकर कामदेव को भस्म कर दिया। इसके बाद नारद मुनि ने हिमालय को शिव-पार्वती विवाह का प्रस्ताव दिया। भगवान शिव और देवी पार्वती का विवाह धूमधाम से संपन्न हुआ। कथा के दौरान अमर सिंह, प्रवीण अग्रवाल, संजीव अग्रवाल, रविन्द्र शर्मा, मनोज अग्रवाल, योगेश गिरि गोस्वामी, नीमा अग्रवाल, निरुपमा अग्रवाल, सुनीता अग्रवाल व अन्य की उपस्थिति रही।