बरेली। कुशीनगर जिले के हाटा ब्लॉक में तैराकी केवल एक खेल नहीं, बल्कि हर घर की परंपरा बन चुकी है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कुशीनगर की बेटियां भी अब ताल से निकलकर तरणताल में कामयाबी तलाश रहीं हैं। शहर में आयोजित तैराकी प्रतियोगिता में जब कुशीनगर की बेटियां तरणताल में उतरीं, तो उनकी मजबूत इच्छाशक्ति साफ नजर आई। इनमें से कई खिलाड़ियों के अभिभावक, तो किसी के अन्य परिजन तैराकी में हाथ आजमा चुके हैं। घर-परिवार से मिली इस प्रेरणा ने ही उन्हें पानी में उतरने का हौसला दिया। गांव के तालाबों में अभ्यास कर आगे बढ़ीं और तरणताल तक का सफर तय किया। अब वे पदक जीतने के लिए तैयार हैं। संवाद
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हमारे गांव में तरणताल नहीं है। हमने तालाब में अभ्यास करके अपने हुनर को निखारा है। देश के लिए मेडल जीतना मेरा सपना है। - अंशिका यादव
हमारे घर में तैराकी पीढि़यों से चली आ रही है। मेरे पापा भी तैराक रहे हैं, और मैं भी इस परंपरा को आगे बढ़ाना चाहती हूं। - अंशिका गुप्ता
गांव में कोई सुविधा नहीं है, लेकिन हमने कभी हिम्मत नहीं हारी। नदी में तैरकर ही खुद को मजबूत बनाया है। - चिंकी चौहान
शहरों में अच्छे तरणताल होते हैं, लेकिन हमारे पास सिर्फ तालाब था। उसी में अभ्यास कर तैराकी पर अपनी पकड़ मजबूत की। - दीपिका कुमारी