बरेली। हाफिजगंज थाना क्षेत्र में 11 साल की छात्रा रिद्धिमा की मौत की गुत्थी पुलिस चार महीने में भी नहीं सुलझा सकी है। उसकी आशा कार्यकर्ता मां और पिता थाने से लेकर लखनऊ तक चक्कर काटकर थक चुके हैं। पुलिस पर आरोप ये भी है कि केस सुलझाने के लिए लिया गया मोबाइल फोन थाने से गायब कर दिया गया है।
13 अक्तूबर 2023 को हाफिजगंज के गौटिया लाड़पुर उस्मानपुर गांव निवासी रिद्धिमा का शव घर में लटका मिला था। पिता धर्मेंद्र कुमार ने इसे हत्या का मामला बताया था। मां कमलेश ने अपने पुत्र के ससुर गांव निवासी गंगादेव व उनके अज्ञात साथियों पर हत्या का शक जताकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। दरअसल, प्रेम विवाह के बाद कमलेश का पुत्र बाहर रह रहा था और उसके ससुराल वालों से परिवार का विवाद बना हुआ था।
पोस्टमॉर्टम में हैंगिंग (लटकने से मौत) की पुष्टि हुई तो पुलिस ने तफ्तीश ढीली कर दी। कमलेश का आरोप है कि पहले हत्यारों ने हत्या के मामले को आत्महत्या दिखाने की कोशिश की और फिर बाकी कमी पुलिस ने पूरी कर दी। उनके मुताबिक शरीर पर चोट के निशान भी थे। आरोप है कि पुलिस ने बेटी के शव के पास मौजूद मोबाइल फोन लेकर कपड़ों के साथ सील कर दिया था। इसमें सात सेकेंड की कॉल थी। पुलिस ने कॉल डिटेल ही नहीं निकलवाई जो अहम सबूत हो सकती है। अब मोबाइल फोन थाने से गुम बताया जा रहा है। पुलिस कह रही है कि आधार कार्ड दे दो, दूसरा मोबाइल फोन दिला देंगे। थाना प्रभारी पर राजनैतिक दबाव में रिपोर्ट बदलने और अधिकारियों को गुमराह करने का आरोप लगाया। बताया कि वह सीएम कार्यालय तक शिकायत कर चुके हैं पर थाना प्रभारी भ्रामक जानकारी देते रहते हैं।
छात्रा की मौत के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट आत्महत्या जैसी आई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। अगर मोबाइल फोन गायब हुआ है तो पीड़ित पक्ष की शिकायत पर संज्ञान लिया जाएगा। - मुकेश मिश्रा, एसपी देहात