बरेली। चार दिनों से 36 पर अटका पारा बुधवार को 38 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। न्यूनतम तापमान 16.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। तापमान का यह अंतर लोगों को बीमार बना रहा है। पाचन शक्ति कम होने से उचित पोषण नहीं होता। रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से बीमारियां घेर लेती हैं। जिला अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक ओपीडी में डिहाइड्रेशन व डायरिया के लक्षण वाले मरीज पहुंचने लगे हैं। बुजुर्ग और बच्चे ज्यादा चपेट में आ रहे हैं। बच्चा वार्ड में डायरिया की चपेट में आए 23 बच्चों का इलाज हो रहा है।
बुखार व दस्त से पीड़ित 300 मरीज रोजाना ओपीडी में पहुंच रहे हैं। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. आरके गुप्ता के मुताबिक हमारे शरीर का तापमान 36.6 से 37.2 डिग्री सेल्सियस तक रहता है। इससे ज्यादा तापमान होने पर लोगों को भटकाव, भ्रम, चिड़चिड़ापन, तेज सिरदर्द, बेहोशी, मांसपेशियों में ऐंठन, दिल की धड़कन बढ़ने की समस्याएं होने लगती हैं।
हवा में नमी कम होने से शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। इससे हृदय, सांस, गुर्दे की पुरानी बीमारियों के बढ़ने की आशंका रहती है। बुखार के मरीजों की जांच में उनकी हृदय गति और रक्तचाप बढ़ा मिल रहा है। सूखी खांसी और जुकाम से भी ज्यादातर लोग परेशान हैं। दवा सेवन के बावजूद उनको सप्ताह भर बाद राहत मिल रही है।
सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह ने शासनादेश के तहत सभी स्वास्थ्य केंद्रों को निर्देश जारी किए हैं। इसमें ओआरएस पैकेट, आईवी तरल पदार्थ, जीवनरक्षक दवाएं, आइसपैक की व्यवस्था, जरूरत के अनुसार रैपिड रिस्पॉन्स टीम तैयार करने, हीट स्ट्रोक के लक्षण मिलने पर प्रोटोकॉल के तहत मुख्यालय को सूचना देने के निर्देश दिए हैं।
- तेज धूप में अधिक परिश्रम वाले कार्य न करें।
- दोपहर में नंगे पांव बाहर न जाएं।
- दोपहर 12 से शाम चार बजे तक सावधानी बरतें।
- ढीले, हल्के रंग के सूती वस्त्र पहनें। खूब पानी पीएं।
- तबीयत बिगड़ने पर डॉक्टर से परामर्श लें।
- ओआरएस का घोल या नींबू पानी का सेवन करें।
- ज्यादा तला-भुना हुआ खाने से बचें।