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Bareilly News: रास्तेभर देखी गोवंश की दुर्दशा, अफसरों ने सुनाई संरक्षण की कथा

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बरेली। विशेष सचिव कुमार प्रशांत बृहस्पतिवार को सड़क मार्ग से लखनऊ से बरेली पहुंचे। जिले की सीमा में प्रवेश करते ही उनका सामना छुट्टा गोवंश से हुआ। कहीं डिवाइडर पर वे आराम फरमा रहे थे तो कहीं कूड़े के ढेर में चारा तलाश रहे थे। रास्तेभर गोवंश की दुर्दशा देखते हए वह बरेली पहुंचे तो अफसर उन्हें छुट्टा पशुओं के संरक्षण की कहानी सुनाने लगे।
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इस पर वह नाराज हुए। बोले- सिर्फ आंकड़े न गिनाएं, मौके पर जाकर हकीकत देखें। उन्होंने जानना चाहा कि कितने छुट्टा पशु घूम रहे हैं तो अफसर कोई जवाब न दे सके। 2019 के बाद इसकी गणना ही नहीं हुई। सिर्फ अनुमान पर ही काम चल रहा है। विशेष सचिव ने सीवीओ से पूछा, पशुगणना कौन कराता है। जवाब आया, सरकार के आदेश पर पशुपालन विभाग और कभी प्रशासन कराता है। विशेष सचिव ने सीवीओ को पशुगणना कराने के निर्देश दिए।
विशेष सचिव ने पूछा कि कहां-कहां कांजी हाउस हैं। किन उप जिलाधिकारियों ने अधिशासी अधिकारियों के साथ इस मुद्दे पर संवाद किया। कितने खंड विकास अधिकारियों ने प्रधानों से छुट्टा पशुओं की संख्या पूछी। उन्हें पकड़ने और गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए क्या नवाचार किया, तो दो खंड विकास अधिकारी और एक उप जिलाधिकारी ही जानकारी दे सके।
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ऐसे खुली प्रशासन के दावे की पोल
विशेष सचिव कुमार प्रशांत बरेली आए तो रास्ते में फरीदपुर हाईवे के डिवाइडर पर छुट्टा पशु बैठे मिले। इस बाबत उन्होंने पूछा तो सीडीओ ने बताया कि 2019 की पशुगणना के मुताबिक जिले में 6972 पशु छुट्टा थे। इससे अधिक गोवंश को सरक्षित किया गया है। तब विशेष सचिव ने कहा कि बड़ी संख्या में छुट्टा गोवंश सड़कों पर घूम रहे हैं। पोल खुलती देख सीडीओ ने सच स्वीकरते हुए बताया कि करीब एक हजार छुट्टा गोवंश अब भी सड़कों पर घूम रहे हैं। सात नए गो-आश्रय स्थल मंजूर हो गए हैं। इनका निर्माण जल्दी शुरू हो जाएगा। सीवीओ डॉ. मेघश्याम ने कहा कि शासनादेश में छुट्टा पशुओं को लेकर दस विभागों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। सभी विभाग जिम्मेदारी निभाएं तो समाधान जल्दी होगा।
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विशेष सचिव ने बताई कार्ययोजना
- छुट्टा पशुओं को कांजी हाउस और गो-आश्रय स्थलों तक पहुंचाएं।
- उप जिलाधिकारी, खंड विकास अधिकारी और पशु चिकित्साधिकारी जिम्मेदारी निभाएं।
- नगरीय क्षेत्रों में अधिशासी अधिकारियों और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधानों से समन्वय स्थापित करें।

- कोटेदारों और प्रधानों के माध्यम से किसानों को प्रेरित कर भूसे का दान कराएं।
- पराली पशुओं के लिए चारा बन सकती है, इसलिए उसे भी दान में लें।
- गोकाष्ठ की बिक्री कराएं, स्वयं सहायता समूहों को सक्रिय कर जैविक खाद का भी निर्माण कराएं।
- चरागाहों से अवैध कब्जे हटाए जाएं, गो-आधारित खेती को प्रोत्साहन दें।
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