कोरोना से बचने के लिए वैक्सीन की दूसरी डोज लगवाते संतोष गंगवार।
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कोरोना के दौर में सीएम को लिखी चिट्ठी में एक भी शब्द नहीं था गलत
बरेली। केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल से बाहर हुए आठ बार के सांसद संतोष गंगवार इस घटनाक्रम पर कुछ भी बोलने से इनकार करते हैं। कहते हैं, कैबिनेट में फेरबदल करना प्रधानमंत्री का अधिकार है लिहाजा इस पर कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने उन सारी चर्चाओं को भी बेबुनियाद बताया जो उनके मंत्रिमंडल से हटने के बाद शुरू हुई थीं। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद श्रम कानून सुधारों पर उनके कार्यकाल में सबसे ज्यादा काम हुआ। कोरोना के दौर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखी गई चिट्ठी में भी एक भी शब्द गलत नहीं था। बोले, मैं संगठन का समर्पित कार्यकर्ता हूं। अब तक जो जिम्मेदारी मिली है, उसे निभाया है। आगे भी निभाता रहूंगा।
सवाल: कैबिनेट में हुई फेरबदल पर क्या कहेंगे।
जवाब: नहीं, इस पर मैं कोई टिप्पणी नहीं कर सकता। यह तो प्रधानमंत्री का अधिकार है।
सवाल: माना जा रहा है कि श्रम कानून में सुधारों की गति धीमी रही। आपके हटने का यह भी कारण रहा।
जवाब: नहीं हटने, हटाने की बात ही नहीं है। यदि आप यह कहते हैं कि श्रम मंत्रालय के काम की रफ्तार धीमी रही तो यह गलत हैं। कोरोना काल में श्रम मंत्रालय ने सबसे ज्यादा काम किया है। बल्कि यह भी कह सकते हैं कि आजादी के बाद श्रम विभाग ने इस बार सबसे अधिक काम किया है। मेरे कार्यकाल में 44 कानूनों के चार लेबर कोर्ट बनाकर राज्यों की सहमति के लिए भेजे गए जिन्हें आधे से ज्यादा राज्यों नेे मंजूरी भी दे दी है। बाकी राज्यों से मंजूरी मिलनी बाकी है। उम्मीद है कि अक्तूबर तक यह लागू भी हो जाएगा।
सवाल: कानून सुधार के अलावा और क्या उपलब्धि मानते हैं आप।
जवाब: हमारी सरकार ने 40 करोड़ से ज्यादा असंगठित मजदूरों को चिह्नित किया है। संगठित पंजीकृत श्रमिकों की संख्या चार करोड़ से बढ़ाकर दस करोड़ की है।
सवाल: कोरोना काल में यूपी सरकार को लिखी गई चिट्ठी मंत्रिमंडल से हटने का कारण बनी क्या।
जवाब: नहीं भाई। पहले भी कहा कि इस पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा, यह पीएम का अधिकार है। मैंने राज्य सरकार को एक चिट्ठी लिखी जरूर थी लेकिन उसमें ऐसा कोई शब्द नहीं है जो गलत हो।
सवाल: चर्चाएं हैं आपको कोई बड़ा पद मिलने वाला है।
जवाब: (हाथ जोड़कर मुस्कराते हुए) मैं संगठन का कार्यकर्ता हूं। संगठन ने आठ बार सांसद बनाया। जो भी जिम्मेदारी अब तक दी, उसका पालन किया है और आगे भी संगठन के निर्देशों का अक्षरश: पालन करता रहूंगा।