बरेली। तीन सौ बेड अस्पताल में बुधवार को ओपीडी बंद रही। नियमों को दरकिनार कर प्रभारी सीएमएस ने डॉक्टरों और स्टाफ का अवकाश घोषित कर दिया। इधर, खांसी, बुखार व अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीज भटकते रहे। कुत्ते-बंदरों के काटने के बाद एआरवी (एंटी रैबीज वैक्सीन) लगवाने पहुंचे लोगों को भी मायूस होकर लौटना पड़ा।
सार्वजनिक अवकाश के बावजूद नियमानुसार अस्पतालों में आधे दिन की ओपीडी संचालित करने का आदेश है। जिला संयुक्त चिकित्सालय और महिला अस्पताल समेत देहात क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आधे दिन की ओपीडी संचालित हुई। सुबह 11 बजे तक परचा बना। दोपहर 12 बजे तक मरीज देखे गए। इमरजेंसी में पहुंचने वाले मरीजों को भी डॉक्टरों ने देखा। इसके विपरीत तीन सौ बेड अस्पताल में सुबह से ही सन्नाटा पसरा रहा। प्रशासनिक भवन, ओपीडी, इमरजेंसी के प्रवेश द्वार पर ताला लगा हुआ था। इलाज के लिए पहुंचे मरीज व्यवस्था को कोसते हुए लौट गए।
नहीं लगी एआरवी
बुधवार सुबह 10 बजे 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला एआरवी लगवाने तीन सौ बेड अस्पताल पहुंची थीं। बताया कि पैर में कुत्ते ने काट लिया है। वहां अस्पताल में कोई स्टाफ मौजूद नहीं था। वह घंटेभर इंतजार करती रहीं। अस्पताल परिसर में रह रहे लोगों से पूछा तो उन्होंने जिला अस्पताल की इमरजेंसी में वैक्सीन लगने की जानकारी देकर वहां जाने का सुझाव दिया।
जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने देखे 327 मरीज
जिला अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे 327 मरीजों को डॉक्टरों ने देखा और दवाएं दीं। सुबह 11 बजे के बाद परचा बनना बंद हो गया। इसके बाद जो मरीज पहुंचे, उन्हें इमरजेंसी से दवाएं दी गईं। हालांकि, पैथोलॉजी बंद होने की वजह से जांच के लिए कई मरीजों के नमूने नहीं लिए जा सके। फरीदपुर सीएचसी अधीक्षक डॉ. अनुराग गौतम के मुताबिक इमरजेंसी में 78 मरीजों को देखा गया।
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ज्यादातर पैरामेडिकल स्टाफ महिला हैं। नवरात्र, रामनवमी के चलते सभी ने हवन-पूजन और कन्या जिमाने के बाद सुबह 11 बजे डयूटी पर आने की बात कही थी। दोपहर 12 बजे तक ओपीडी थी। घंटेभर के लिए बुलाना उचित प्रतीत नहीं हुआ। लिहाजा, अवकाश का आदेश किया। - डॉ. सतीश चंद्रा, प्रभारी सीएमएस, तीन सौ बेड अस्पताल