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Ritu Saxena: बरेली की रितु के नाम हुआ मिसेज इंडिया वर्ल्ड वाइड ट्रू सेल्फ का खिताब

Tue, 09 Aug 2022 03:26 PM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, बरेली

सार

इंदिरानगर के रहने वाले बरेली कॉलेज के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. योगेंद्र बहादुर की बेटी रितु सक्सेना ने मिसेज इंडिया वर्ल्डवाइड-2022 की प्रतियोगिता में भाग लिया और मिसेज ट्रू सेल्फ टाइटल पर कब्जा किया।
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रितु सक्सेना - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पचास साल की उम्र में ज्यादातर महिलाएं पारिवारिक तानेबाने में उलझकर रह जाती हैं। शारीरिक दिक्कतें भी सिर उठाने लगती हैं पर इसी उम्र में रितु सक्सेना ने मिसेज इंडिया वर्ल्डवाइड-2022 की प्रतियोगिता के फाइनलिस्ट तक पहुंचने का सफर तय किया। ‘मिसेज ट्रू सेल्फ’ टाइटल पर कब्जा कर उन्होंने बरेली वासियों को गौरवान्वित होने का मौका दिया। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने प्रतियोगिता संबंधी जानकारियां और अपने अनुभव साझा किए।

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इंदिरानगर के रहने वाले बरेली कॉलेज के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. योगेंद्र बहादुर की बेटी रितु सक्सेना ने यह कामयाबी हासिल की है। प्रतियोगिता में भारत के नॉर्थ, ईस्ट, वेस्ट, साउथ जोन और इंटरनेशनल इन पांच श्रेणियों में आवेदन हुए थे। बरेली से होने के नाते उन्होंने पिछले साल नॉर्थ जोन से आवेदन किया था। प्रतियोगिता के लिए 21 देशों से 15 हजार आवेदन हुए थे।

चयन की प्रक्रिया इंट्रोडक्शन राउंड, रैंप वॉक, टैलेंट राउंड, फोटोशूट के जरिये पूरी हुई। इसमें 109 प्रतिभागियों का चयन किया गया था। फिर देहरादून में ही ओरिएंटेशन प्रोग्राम हुआ। कोरोना महामारी की दूसरी लहर के कारण प्रतियोगिता स्थगित रही थी। पिछले माह संयुक्त अरब अमीरात के शहर रास अल खैमाह में प्रतियोगिता का फाइनल हुआ था। यहां रितु को ‘मिसेज ट्रू सेल्फ’ अवॉर्ड से नवाजा गया और उन्हें क्राउन पहनाया गया।
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15 साल बाद सोशल मीडिया से आया नया मोड
रितु बताती हैं कि उन्होंने सेंट मारिया स्कूल से दसवीं तक और साहू गोपीनाथ कॉलेज से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की। बरेली कॉलेज से बीए, बीएड और एमए किया। एमएम में बरेली कॉलेज से गोल्ड मेडल मिला था। उनका विवाह दिल्ली के रहने वाले एयरफोर्स में ग्रुप कैप्टन असित सक्सेना से हुआ। करीब 15 साल तक पति की तैनाती स्थल के डिग्री कॉलेजों में इतिहास की शिक्षिका के तौर पर सेवाएं दीं। सोशल मीडिया के जरिये उन्हें मिसेज इंडिया वर्ल्डवाइड-2022 की जानकारी मिली। सहयोगियों के सुझाव पर उन्होंने आवेदन किया, चयन हुआ और सफल रहीं।

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सफलता में उम्र बाधक नहीं, लगन जरूरी
ट्रू सेल्फ क्राउन से नवाजी गईं रितु का कहना है कि ढलती उम्र के साथ 99 फीसदी महिलाएं में आगे बढ़ने का जुनून और रोमांच खत्म होने लगता है। हालांकि वे अगर कुछ नया करना चाहती हैं, तो उम्र इसमें कभी बाधा नहीं बनती। परिवार का अगर उन्हें सहयोग मिले तो वे नए मुकाम हासिल कर सकती हैं। इस मामले में वे खुद को भाग्यशाली मानती हैं। पति के साथ उनकी दोनों बेटियों सलोनी और मासूमी ने उन्हें प्रोत्साहित किया। इसकी वजह से वह सफल रहीं। अपनी सफलता का श्रेय बाबा स्वर्गीय ब्रह्मनारायण को देती हैं। कहा, बाबा से ही उन्हें चुनौतियों का सामना करने की सीख मिली थी।
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