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रिंग रोड घोटाला: सरनिया में भूखंड और उस पर बने स्ट्रक्चर की कराई गई पैमाइश

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अधिकारियों की टीम ने कराई वीडियोग्राॅफी, मुआवजे से जुड़े अभिलेख भी खंगाले, भू-स्वामी से की बातचीत
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बरेली। रिंग रोड के दायरे में स्थित गांव सरनिया के गाटा संख्या 156 और उस पर बने स्ट्रक्चर के बदले 12.48 करोड़ रुपये मुआवजा तय करने का मामला संदिग्ध है। अधिकारियों की टीम ने बुधवार को स्थलीय निरीक्षण कर सड़क व स्ट्रक्चर की पैमाइश कराई। मौके की वीडियोग्राॅफी भी कराई। भू-स्वामी से बातचीत की। संबंधित अभिलेख भी खंगाले गए।

विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी आशीष कुमार, पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता राजीव अग्रवाल, एसडीएम सदर, तहसीलदार और एनएचएआई के परियोजना निदेशक प्रशांत दुबे दोपहर 12 बजे सरनिया पहुंचे। टीम गांव में करीब दो घंटे रही। भूखंड के सामने की सड़क 3.80 मीटर चौड़ी मिली। दोनों ओर के नाले को जोड़कर मार्ग करीब 10 मीटर चौड़ा पाया गया। राजस्व रिकाॅर्ड में भी यही दर्ज है। इसके बाद टीम ने गाटा संख्या 156 का निरीक्षण किया। उस पर 0.3660 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बने स्ट्रक्चर को देखा। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता ने प्रारंभिक तौर पर स्ट्रक्चर का मूल्यांकन किया। अब पिछली और अब की मूल्यांकन रिपोर्ट के आधार पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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इस मौजूद वहां भू-स्वामी ने कहा कि वर्ष 2023 में अधिकारियों ने ही मुआवजा तय किया था, अब वही अड़चन लगा रहे हैं। उन्हें न जमीन वापस मिल रही है, न ही मुआवजा। लगातार जांच और सवालों से वह परेशान हो चुके हैं। भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी होने के बाद आपत्ति मांगी गई थी। तब उन्होंने अकृषि भूमि को कृषि भूमि दर्शाने पर आपत्ति की थी। उसके बाद ही उनकी भूमि को अकृषि घोषित किया गया था। गोदाम का निर्माण भी पहले का है। जांच के बाद अधिकारियों की टीम ने उनकी जमीन को अकृषि घोषित किया है। इसमें उनकी जिम्मेदारी कहां बनती है? यह भी साफ होना चाहिए।



टीम ने मौके पर जाकर जांच की है। पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं को पुनर्मूल्यांकन करना है। रिपोर्ट आने पर पता लग सकेगा कि पिछले और अब के मूल्यांकन में कितना अंतर है? इसी आधार पर कार्रवाई की जाएगी। - आशीष कुमार, भूमि अध्याप्ति अधिकारी




अधिशासी अभियंता सेवानिवृत्त, सहायक अभियंता का पता नहीं

वर्ष 2023 में मूल्यांकन के दौरान अधिशासी अभियंता नारायण सिंह थे, जो सेवानिवृत्त हो गए हैं, पर अवर अभियंता व सहायक अभियंता कौन थे, यह अभी तक साफ नहीं है। हस्ताक्षर किसके हैं, यह देखा जा रहा है। अधिशासी अभियंता राजीव कुमार अग्रवाल ने पुराने रिकाॅर्ड खंगाले और मूल्यांकन के तरीके को समझने के लिए अधिकारियों के साथ बैठक की।
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गोदाम के मुआवजा तय करने के मामले में छानबीन

बरेली। सरनिया में 0.3660 हेक्टेयर भूमि पर आरसीसी पिलर और दीवार के साथ टीन शेड (गोदाम) मिला। इसी के बदले पांच करोड़ 91 लाख रुपये मुआवजा तय किया था। मुआवजा अभी बंटा नहीं है। मौके पर 60 मीटर लंबाई और 61 मीटर चौड़ाई का गोदाम है। यह भी पता लगा है कि हाईवे के लिए 60 मीटर चौड़ी जमीन ली जानी थी तो क्या इसकी जानकारी मिलने के बाद यह गोदाम बना। भूमि अध्याप्ति अधिकारी आशीष कुमार का कहना है कि पहले भी एनएचएआई के मूल्यांकनकर्ता ने मूल्यांकन किया और पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन अभियंताओं ने पुनर्मूल्यांकन किया था। अब मामला आर्बिटेशन में है और पीडब्ल्यूडी के अभियंता मूल्यांकन कर रहे हैं। उनकी आख्या आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। ब्यूरो
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