बरेली। शहर के बड़े उद्यमी समेत तीन लोगों पर करोड़ों रुपये की जमीन हड़पने, तोड़फोड़ करने और धमकी देने के आरोप में आईजी के आदेश पर इज्जतनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई है।
सिविल लाइंस निवासी कमर अख्तर के मुताबिक इज्जतनगर के मठ कमलनैनपुर में उनकी पैतृक जमीन है। जमीन का कुछ हिस्सा वर्ष 1955 में और कुछ 1978 में उनके नाम दर्ज हुआ। खसरा नंबर 56 से 73 तक की जमीन के वह अकेले मालिक थे। जमीन को लेकर कमर का भाइयों से विवाद हुआ पर वर्ष 2012 में एसडीएम ने कमर अख्तर को जमीन का एकल स्वामी होने का आदेश दिया। कमर अख्तर के भाइयों ने आदेश के खिलाफ कमिश्नर न्यायालय में अपील की थी जो खारिज हो गई। कमर के भाई आफताब आलम, सईद अख्तर और तय्यब अली की मौत हो चुकी है।
कमर का आरोप है कि शहर के बड़े उद्यमी अनिल अग्रवाल ने उनके भाइयों से मिलकर जमीन हड़पने की योजना बनाई। मुकदमेबाजी खत्म कराकर जमीन खरीदने का प्रस्ताव रखा। अनिल ने वर्ष 2015 में कमर से 2,907 वर्गमीटर जमीन का बैनामा अपनी फर्म के नाम करा लिया। बाकी जमीन को भी जल्दी खरीदने का झांसा दिया। आरोप है कि अनिल और मनोज शुक्ला ने कमर के भाइयों से बैनामे करा लिए, जबकि वे जमीन पर मालिकाना हक नहीं रखते थे। अनिल ने कमर से कई कूटरचित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करा लिए थे। जमीन को कृषि योग्य दर्शाकर स्टांप की भी चोरी की।
अभी कमर अख्तर की कुछ जमीन बची है। उसे कब्जे से बचाने के लिए कमर ने सिविल न्यायालय में मुकदमा दायर कर रखा है। कमर की जमीन पर बने निर्माण को पिछले महीने अनिल ने गिराना शुरू कर दिया। कमर अपने पुत्र शमीम के साथ मौके पर पहुंचे तो हथियारबंद बदमाशों ने जान से मारने की धमकी भी दी थी। उन्होंने आईजी से शिकायत की तो अनिल अग्रवाल, मनोज शुक्ला और अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।
उद्यमी अनिल अग्रवाल ने कहा कि हमें ब्लैकमेल करने की कोशिश की जा रही थी। कमर अख्तर के सरपरस्त एक अधिवक्ता ने यह फर्जी मामला तैयार कर अधिकारियों को गुमराह किया है। कमर अख्तर ने भी हमें जमीन बेची थी, जिसके सभी वैध प्रपत्र हमारे पास मौजूद हैं। हम साफ सुथरी छवि के व्यवसायी हैं। पुलिस-प्रशासन नियमानुसार जांच कर ले, सच सामने आ जाएगा।