बरेली। अकिंचन महाराज ने कहा कि नरसी भक्त की निष्काम भक्ति के कारण ही प्रभु ने कहा था कि ये नरसी मेरा मालिक है। नरसी मुझे बाजार में बेचे तो वह बिकने को भी तैयार हैं। आनंद आश्रम में अध्यात्म की गूंज परिवार के तत्वावधान में कथा के अंतिम दिन उन्होंने कहा कि यह नरसी की निष्काम भक्ति के कारण ही संभव हो सका था। ईश्वर की भक्ति निस्वार्थ भाव से करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गौमाता मेें सात्विक भाव विद्यमान है। गौमाता के पृथ्वी पर न रहने से प्रलय आ जाएगी। इसके बाद भक्तों ने सांवरिया सेठ भगवान श्रीकृष्ण नरसी भात का मंचन किया। कथा के बीच उन्होंने भजन भी सुनाए। कार्यक्रम में सुमेधा अग्रवाल, रूबी, प्रतिभा, कंचन, सारिका आदि महिलाओं का सहयोग रहा।