बरेली। महाभारत काल में घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक परम शूरवीर योद्धा थे। उनके देखने मात्र से ही शत्रु सेना सात कदम पीछे हट जाती थी। श्रीराधा माधव संकीर्तन मंडल के तत्वावधान में आनंद आश्रम में चल रही श्रीमद्भागवत में स्वामी डॉ. देवकी नंदन ने बताया कि महाभारत के युद्ध में भगवान श्रीकृष्ण ने सोचा कि बर्बरीक कौरवों की ओर चला गया तो उनकी विजय संभव है। यह जानकर श्रीकृष्ण ने बर्बरीक से दान में उसका सिर मांग लिया। इस पर बर्बरीक ने कहा कि उसकी इच्छा महाभारत का युद्ध देखने की है, सिर कटने के बाद वह वंचित रह जाएगा। श्रीकृष्ण ने वरदान दिया कि युद्ध होने तक उसका सिर जीवित रहेगा। कलयुग में वह श्याम प्रभु खाटू वाले के नाम से जाने जाएंगे और भक्तों की अभिलाषा पूरी करेंगे। श्रीमद्भागवत में सौरभ मेहरोत्रा, राजीव अग्रवाल, सुरेश मिन्ना, संजय शर्मा, जुगल किशोर साबू, डीके अग्रवाल आदि उपस्थित थे।