बरेली। डॉ. देवकी नंदन ने सावित्री सत्यवान पौराणिक कथा का विस्तृत वर्णन किया। यह कथा मार्कण्डेय मुनि ने युधिष्ठर को सुनाई थी। कथा का मंचन भी किया गया।
आनंद आश्रम में रासलीला के माध्यम से उन्होंने बताया कि सावित्री का जन्म मद्रदेश के राजा अश्वपति के घर में हुआ था। वह विवाह योग्य हुईं तो प्रथा के अनुसार राजा ने स्वयंवर करने को कहा। पिता की आज्ञा पाकर सावित्री ने शाल्वदेश के राजा के पुत्र सत्यवान के बारे में राजा अश्वपति को बताया। पिता पुत्री के वार्तालाप के दौरान नारद मुनि प्रकट हुए। उन्होंने बताया कि सत्यवान की उम्र एक साल ही बची है। उन्होंने सावित्री को मनाने की कोशिश तो वह बोली, सत्यवान को अपना पति मान चुकी हैं। इसके बाद राजा ने उसका विवाह कर दिया। साल भर सावित्री ने कठिन तप किया। एक वर्ष खत्म होने से चार दिन पहले सत्यवान लड़कियां काटने जंगल गए। वहां उनकी तबीयत खराब हो गई। उसी समय यमराज आ गए। वह सत्यवान के प्राण ले जाने लगे तो कठोर पति व्रत के प्रभाव से सावित्री यमराज के साथ जाने लगी और पति के प्राण वापस करने की प्रार्थना करने लगी। सावित्री का हठ देखकर उन्होंने वरदान मांगने को कहा तो सावित्री ने यशस्वी पुत्रवती होने का वरदान मांगा। यमराज तथास्तु कहकर जाने लगे, उन्होंने देखा कि सावित्री फिर भी उनके पीछे आ रही है। उन्होंने कहा कि जब आप पति को ले जा रहे थे तो वरदान कैसे पूरा होगा। इसके बाद यमराज ने सत्यवान के प्राण लौटा दिए। डॉ. देवकी नंदन ने बताया कि कठोर पतिव्रता धर्म के पालन से ही काल पर भी विजय पाई जा सकती है। प्रात: कालीन सत्र में नादर मोह और रामजन्म का वर्णन किया गया। कथा में वीके अग्रवाल, संजय शर्मा, बीना माथुर, वीना माथुर, गौरी शंकर गोयल आदि उपस्थित थे।