बरेली। हरि मंदिर में चल रहे वार्षिक भक्ति ज्ञान महोत्सव में पठानकोट से आए अतुल शास्त्री ने छठे दिन ईश्वर नाम के स्मरण का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि कलियुग में भागवत कथा सुनने से आनंद और पुण्य की प्राप्ति होती है। रुक्मणि विवाह का भी वर्णन किया। सुबह के सत्र में रामदेव मिश्र ने बिल्व मंगल के सूरदास बनने का प्रसंग सुनाया। बताया कि पिता की मृत्यु केे अगले दिन ही बिल्व मंगल वैश्या के पास पहुंच गए थे। वैश्या ने उनसे कहा कि जितना प्रेम वह उसके हाड़-मांस के शरीर से करते हैं अगर उतना ईश्वर से करें तो उनको भवसागर से मुक्ति मिल जाएगी। आयोजन में महिला मंडल की रेनू, नीलम साहनी, नेहा आनंद, कंचन अरोरा, ममता आदि का सहयोग रहा।