बरेली। रामायण मंदिर में चल रहे गोस्वामी तुलसीदास के जयंती महोत्सव में श्रीराम कथा के सातवें दिन बुधवार को पठानकोट से आए कथा व्यास रविनंदन शास्त्री ने संत और गुरु मिलन का मार्ग सुझाया। बताया कि अभिमान त्यागने के बाद ही जीवात्मा को सतगुरु मिल सकते हैं। कहा, गुरु के प्रति सच्ची निष्ठा से अक्षम व्यक्ति भी सक्षम बन जाता है। शिष्य भी वही धन्य है जिसे गुरु का मार्गदर्शन प्राप्त होता है। इसके बाद उन्होंने ‘सखी री बरसाने में आज लाडली प्यार लौट आती है’ भजन सुनाकर श्रद्धालुओं को झूमने पर विवश कर दिया। प्रसाद वितरण से कथा का विश्राम हुआ।