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सुख की कामना है दुखों का कारण

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बरेली। माधोबाड़ी स्थित रामायण मंदिर में चल रहे तुलसी जयंती महोत्सव के क्रम में शनिवार को राम कथा में कथा व्यास रविनंदन शास्त्री ने गुरु की महिमा का महात्म्य बताया। कहा, कलयुग में सत गुरु सीमित हैं लेकिन ढोंगी गुरुओं की तादाद सर्वाधिक है। उन्होंने श्रद्धालुओं के नामकरण संस्कार के दौरान गुरु की ओर से सुझाए गए नाम को ही रखने का सुझाव दिया। बताया कि नाम सिर्फ व्यक्ति की पहचान ही नहीं बल्कि संपूर्ण जीवन को पिरोने का जरिया होता है। सुख और आनंद के भेद को बताते हुए कहा, सुख की कामना ही दुखों की मुख्य वजह है। इसलिए इच्छाओं को सीमित और व्यवहार को सात्विक रखते हुए कर्म करने का सुझाव दिया। कार्यक्रम की जानकारी भजन गायक जगदीश भाटिया ने दी।
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