पुलिस की भूमिका पर लोग उठा रहे सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। लगातार दो गैर जमानती वारंट के बाद भी मौलाना तौकीर रजा खां पुलिस को खोजे नहीं मिल रहे थे। वहीं जिला अदालत का फैसला पक्ष में आने पर बृहस्पतिवार रात शहर में लौटकर सामने आए मौलाना ने प्रेसवार्ता तक कर दी। चुनावी मौसम में हुए इस घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर कमेंट की बाढ़ आई हुई है। लोग अलग-अलग राय जाहिर कर रहे हैं। खासतौर पर पुलिस को मौलाना के न मिलने का मामला उठ रहा है।
इत्तेहादे मिल्लत काउंसिल (आईएमसी) वर्ष 2010 के दंगों का केस एडीजे फास्ट ट्रैक कोर्ट से जिला अदालत में ट्रांसफर होने को राहत के तौर पर देख रही है। वहीं सोशल मीडिया पर शुक्रवार को वायरल एक संदेश में अचानक केस ट्रांसफर करने को लेकर गुस्सा जाहिर किया गया। संदेश में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। वायरल संदेश में 2010 में हुए दंगे के पीड़ितों को न्याय दिलाने की बातें भी लिखी गई हैं। मौलाना की प्रेस कांफ्रेंस के बाद भी लोगों ने पुलिस के रवैये पर तंज कसे हैं। लिखा है कि पुलिस आरोपी को पकड़ व ढूंढ नहीं पाती है। एक और संदेश वायरल हो रहा है। इसमें लिखा है कि मैं 2010 बरेली हूं, क्या हुआ न्याय मिलेगा...। वहीं मौलाना समर्थक जिला अदालत के फैसले को न्याय की जीत करार दे रहे हैं।
निदा की टिप्पणी...मौलाना ने शरीयत का गलत फायदा उठाया और कानून का भी
- आला हजरत खानदान की बहू निदा खान ने भी मौलाना तौकीर रजा खां को लेकर फेसबुक पर टिप्पणी की है। निदा खान ने अपने फेसबुक अकाउंट पर अखबार में छपी केस ट्रांसफर की खबर डालते हुए लिखा है कि यह शरीयत का भी नाजायज फायदा उठाएंगे और कानून का भी। निदा ने पोस्ट के माध्यम से लोगों से पूछा है कि यह कभी जेल जाएंगे?