बरेली। अधूरे विकास कार्यों और राजस्व संबंधी शिकायतों के निस्तारण का फीडबैक खराब होने से सीएम डैश बोर्ड में जिले की रैंकिंग फिसल गई। सितंबर में जिला 21वें पायदान पर रहा, जबकि अगस्त में 11वां स्थान मिला था। जुलाई में तो जिला टॉप थ्री में शामिल रहा था।
रामगंगा बैराज सिंचाई परियोजना केंद्रीय जल आयोग में फंस गई। मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री आवास योजना में नए लक्ष्य आवंटित हुए, पर आवासों के निर्माण की शुरुआत तक नहीं हो सकी। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में भी उपलब्धि कम रही। पर्यटन स्थलों को विकसित करने में भी हम फिसड्डी साबित हुए। इन सबकी वजह से जिले की रैंकिंग गिरती चली गई।
विकास के मामले में अगस्त में जिला 6वीं रैंक पर था। सितंबर में यह आठवें पायदान पर आ गया। राजस्व संबंधी मामलों में जुलाई में दसवीं, अगस्त में 33वीं और सितंबर में 35वीं रैंक मिली। दोनों को मिलाकर ओवरऑल रैंकिंग तय की जाती है।
विकास से जुड़े जिन विभागों की वजह से जिले की रैंकिंग गिरी है, उनके साथ बैठक करके योजनाओं को रफ्तार देंगे। अगली बार जिले की रैंकिंग में सुधार दिखेगा। - जगप्रवेश, मुख्य विकास अधिकारी
राजस्व संंबंधी आईजीआरएस की शिकायतों का निस्तारण किया जा रहा है, लेकिन कुछ मामलों में शिकायतकर्ता संतुष्ट नहीं हुए। इसलिए फीडबैक में हम पिछड़ गए। इसमें सुधार कराया जाएगा। - दिनेश, एडीएम प्रशासन
यहां चूके
- प्रधानमंत्री आवास योजना में जिले के पास 22,184 का लक्ष्य था। इसमें सिर्फ 104 आवास बनने को रह गए है। अब 1280 आवास बनाने का लक्ष्य 15 सितंबर को मिला है। नए लक्ष्य के सापेक्ष प्रगति कम होने से सीएम डैश बोर्ड की समीक्षा में जिला बी से ई श्रेणी में चला गया। मुख्यमंत्री आवास योजना में जिला ए ग्रेड में था, लेकिन जब 721 का नया लक्ष्य सितंबर में आया तो उसमें प्रगति कम रही और जिला ई श्रेणी में चला गया।
अमर उजाला ब्यूरो