बरेली। पिछले साल जलप्रवाह का दंश सहने के बाद अबकी बार मौसम के तेवर देख प्रशासन अलर्ट हो गया है। जिला प्रशासन ने सिंचाई विभाग और बाढ़ खंड कार्यालय को लगातार निगरानी के निर्देश दिए हैं। साथ ही, दैनिक रिपोर्ट भी तैयार की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक दो दिन से हो रही बारिश के बावजूद नदियों का जलस्तर अभी सामान्य है। 72 घंटे और बारिश होने पर खतरे की आशंका जताई है।
पिछले साल पहाड़ों के साथ मैदानी इलाकों में हो रही तेज बारिश के साथ ही, डैम खोल दिए गए थे। नतीजा, बरेली के 72 गांवों में जलप्रवाह से मनुष्य समेत जीव-जंतु भी प्रभावित हुए थे। हजारों किसानों की फसल खेतों में ही सड़ गई थी और कई घर गिर गए थे। सर्वे में करीब 40 फीसदी खेती प्रभावित होने का दावा था। बड़े पैमाने पर हुई दिक्कतों से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने सभी संभावित प्रयास किए। अब हो रही तेज बारिश को देखते हुए आपदा प्रबंधन के लिए शासन ने नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (एनडीआरएफ )बरेली के लिए तैनात कर दी है। इधर, प्रशासन ने बाढ़ चौकियों को अलर्ट करने के निर्देश दिए हैं।
बाढ़ खंड के एसडीओ अमित किशोर के मुताबिक रामगंगा का जलस्तर मुरादाबाद से कटघर की ओर 187.82 मीटर, चौबारी गेज पर 158.81 मीटर दर्ज किया जा रहा है। जो लगातार बढ़ रहा है। 162.07 मीटर पर अलर्ट जारी होगा। 163.07 मीटर खतरे के निशान है। 164.29 मीटर के उफान पर बाढ़ का प्रभाव माना जाएगा। हालांकि, अभी रामगंगा खतरे के निशान से करीब पांच मीटर कम है।
बाढ़ नियंत्रण कक्ष तैयार, शरणालय चिह्नित
बाढ़ की स्थिति में रामगंगा नदी से करीब 73 गांव प्रभावित हो सकते हैं। आपदा प्रबंधन के तहत रामगंगा नदी के बढ़ते जल स्तर पर 24 घंटे निगरानी के लिए जल स्तर मापक यंत्र सुचारू है। जिला मुख्यालय में बाढ़ नियंत्रण कक्ष भी तैयार है। आपदा के दौरान लोगों को अस्थायी ठहराने, खान-पान की व्यवस्था के साथ 69 शरणालय चिह्नित हो गए हैं। सदर क्षेत्र में पांच बाढ़ चौकियां बनी हैं। जिनके प्रभारी राजस्व निरीक्षण व खंड विकास अधिकारी हैं। जरूरत के मुताबिक आठ नाव और एक मोटरबोट भी तैनात की जाएंगी।