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हिलते-डुलते किला पुल से नहीं गुजरेंगे भारी वाहन, पांच करोड़ से होगी मरम्मत

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कमिश्नर ने किला पुल का किया निरिक्षण - अमर उजाला
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बरेली। शहर के सबसे पुराने किला ओवरब्रिज से बृहस्पतिवार से भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लग जाएगी। पुल की हालत ठीक नहीं है। भारी वाहनों के कारण पुल हिलने-डुलने लगता है। पुल के खतरनाक होने का अंदाजा खुद कमिश्नर संयुक्ता समद्दार ने बुधवार को निरीक्षण करके लगाया। अफसरों से कहा- पहले पुल की मरम्मत कराएं। इसके बाद ही भारी वाहन दौड़ाएं। पीडब्ल्यूडी पुल की मरम्मत के लिए शासन को भेजे गए प्रस्ताव को मंजूर कराने को पैरवी करे। सेतु निगम मरम्मत की तैयारी करे। यातायात पुलिस को निर्देश दिए कि इसके लिए विस्तृत रूट डायवर्जन का प्लान तैयार कर लिया जाए ताकि वाहन चालकों को परेशानी न हो। किला पुल के हाल को अमर उजाला ने कई बार अफसरों के सामने रखा। इसकी जांच से लेकर मरम्मत के प्रस्ताव आदि तैयार हुए। अब जाकर पुल का भार कम होगा।
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अफसरों की लापरवाही से वक्त से पहले ही बूढ़ा हो गया पुल
दिल्ली हाईवे पर किला पुल वर्ष 1982 में बनाया गया था। इसकी लंबाई 581 मीटर है। पुल की आयु करीब 60 वर्ष निर्धारित थी, लेकिन अफसरों की लापरवाही से पुल की उम्र कम होती गई। पुल पर सड़क पर सड़क बनाते गए और इसका भार बढ़ता गया। पुल की लगातार भारी होती पीठ हिलने लगी। लोहे की ग्रिल बाहर निकल आई। ग्रिल के बीच की चौड़ाई अधिक होने से पानी का रिसाव होने लगा तो पिलर का हाल भी खराब हो गया। पिलर नंबर 14 और 15 तो अब पुल का बोझ ही नहीं उठा पा रहे हैं। लिंटर ने भी पिलर का साथ छोड़ दिया है। पुल की सड़क पर आरपार इतने बड़े छेद हो गए हैं कि उनसे नीचे भूतल साफ दिखने लगा है। भारी वाहनों की धमक से पुल के लिंटर के सरियों के जाल से सीमेंट छूटकर गिरने लगी है। पुल में कई जगह दरारें पड़ गई हैं। अमर उजाला ने पुल की खतरनाक होती स्थिति बयां की तो वर्ष 2019 सेतु निगम ने इसका हाल शासन तक पहुंचाया। किला पुल से नई दिल्ली, मुरादाबाद, रामपुर आने-जाने वाले वाहनों समेत करीब चार लाख वाहन रोज गुजरते हैं।
आईआईटी रुड़की की टीम ने भी पुल का बताया था खतरनाक
लखनऊ से 25 अगस्त, 2020 को आई ब्रिज इंस्पेक्शन यूनिट की टीम ने सेतु निगम के अधिकारियों के साथ पुल का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के बाद उन्होंने इसे खतरनाक बताया था। कहा था कि इसे तत्काल मरम्मत की जरूरत है। रिपोर्ट देने के दो साल बीतने के बाद भी इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। यहां तक कि रिपोर्ट मिलने के बावजूद अधिकारियों को न इसे असुरक्षित घोषित करने का ख्याल आया है और न इसकी मरम्मत कराई जा रही है। आईआईटी रुड़की की टीम ने भी इस पुल को खतरनाक माना था। आसपास के लोगों को आशंका है कि कभी भी पुल से बड़ा हादसा हो सकता है। पीडब्ल्यूडी ने दो बार पुल की मरम्मत के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा लेकिन मंजूरी नहीं मिली। गुजरात के मोरबी की पुल घटना ने सबको झकझोर दिया। उसके कारण भी अफसरों ने इस पुल को अब गंभीरता से लिया है।
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कमिश्नर ने सभी पुलों की स्थिति की रिपोर्ट मांगी
कमिश्नर संयुक्ता समद्दार ने हार्टमन, कुदेशिया पुल की रिपोर्ट भी सेतु निगम के अधिकारियों से तलब की है। श्यामगंज पुल भी जल्द बनाया गया है लेकिन गड्ढे इसमें भी दिखने लगे हैं। अधिकारी दो दिन में इसकी रिपोर्ट कमिश्नर को देंगे। इसके साथ ही इन सभी पुलों की हालत ठीक करनी होगी। कमिश्नर ने कहा है कि प्रशासन की पहली प्राथमिकता हादसों को रोकना और लोगों का जीवन बचाना है। उन्होंने किला पुल की हालत देखते ही पीडब्ल्यूडी से कहा है कि जल्द से जल्द बजट आवंटन के लिए पैरवी करें। वह खुद भी इसके लिए प्रयास करेंगी। हर हाल में पुल का हाल ठीक होना चाहिए। लापरवाही किसी हाल में बर्दाश्त नहीं होगी।
किला पुल पर बृहस्पतिवार से बस, ट्रैक जैसे बड़े वाहनों की आवाजाही नहीं हो पाएगी। इसके लिए पुल पर हाइटगेज लगाए जाएंगे। बदायूं, पुलिस लाइन व रामपुर मार्ग की ओर से आने वाली भारी वाहन दूसरे मार्गों से गुजारे जाएंगे। इसके लिए पूरा प्लान तैयार हो रहा है। पुल की मरम्मत जल्द करवाई जाएगी। - वीके सेन, डीपीएम, सेतु निगम
किला पुल की मरम्मत के लिए पैसे जल्द मिल जाएंगे। इसके लिए शासन स्तर पर बात हो गई है। पैसे मिलने के बाद मरम्मत कार्य शुरू हो जाएगा। - एमएम निसार, मुख्य अभियंता, पीडब्ल्यूडी
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