बरेली। करीब 47 साल पहले बना किला पुल 2020 में ही जर्जर घोषित किया जा चुका है। इसके बाद भी पुल पर हर तरह के वाहन फ र्राटा भर रहे हैं। यह पुल कभी भी हादसे का शिकार हो सकता है। दो साल पहले जांच करने आई ब्रिज इंस्पेक्शन यूनिट की टीम इसे खतरनाक बताकर रिपोर्ट भी दे चुकी है। टीम ने कहा था कि पुल चलने लायक नहीं है। पिलर नंबर 14 और 15 तो अब पुल का ही बोझ नहीं उठा पा रहे हैं। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
किला पुल के पिलर नंबर 14 और 15 के बीच का हिस्सा तो इस कदर जर्जर हो चुका है कि लिंटर ने भी पिलर का साथ छोड़ दिया है। पुल की सड़क पर आरपार इतने बड़े छेद हो गए हैं कि उनसे नीचे भूतल साफ दिखने लगा है। भारी वाहनों की धमक से पुल के लिंटर के सरियों के जाल से सीमेंट छूटकर गिरने लगी है। पुल में कई जगह दरारें पड़ गई हैं।
ऊपर भारी वाहन या फि र नीचे ट्रेन गुजरने पर पुल बुरी तरह थरथराने लगता है। धमक से पुल के छज्जों से सीमेंट छूटकर गिरने लगता है। 25 अगस्त 2020 को लखनऊ से आई ब्रिज इंस्पेक्शन यूनिट की टीम ने सेतु निगम के अधिकारियों के साथ पुल का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के बाद उन्होंने इसे खतरनाक बताया था। कहा था कि इसे तत्काल मरम्मत की जरूरत है। रिपोर्ट देने के दो साल बीतने के बाद भी इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। यहां तक कि रिपोर्ट मिलने के बावजूद अधिकारियों को न इसे असुरक्षित घोषित करने का ख्याल आया है और न इसकी मरम्मत कराई जा रही है। आसपास के लोगों को आशंका है कि कभी भी पुल से बड़ा हादसा हो सकता है।
पीडब्ल्यूडी बढ़ाता गया पुल पर वजन
पुलों पर दोबारा सड़क बनाने के लिए उस पर डामर की पुरानी परत को हटाया जाता है ताकि पुल पर वजन न बढ़े लेकिन किला पुल पर जब भी सड़क का पुनर्निर्माण हुआ तो पुरानी परत हटाए बगैर ही उसके ऊपर ही कोलतार-बजरी की नयी मोटी परत चढ़ा दी गई। इससे पुल का वजन उसकी क्षमता से हजारों टन ज्यादा बढ़ गया। इससे न सिर्फ पुल समय से पहले जर्जर हो गया बल्कि 24 घंटे भारी यातायात गुजरने से उसकी दशा और खराब हो गई। पुल की स्थिति अब लगातार और बिगड़ती जा रही है। इस पर पीडब्ल्यूडी ने मरम्मत के लिए दो करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर तीन महीने पहले भेजा था, लेकिन अब तक शासन से इसे मंजूरी नहीं मिल सकी है।
आईआईटी रुड़की से भी मदद नहीं मिली
अमर उजाला में जर्जर पुल की स्थिति की खबरें लगातार प्रकाशित होने के बाद 2019 में पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन मुख्य अभियंता राकेश राजवंशी ने पुल की पुरानी परतें हटाने के लिए रुड़की आईआईटी से तकनीकी सहायता मांगी थी लेकिन वहां से भी कोई मदद नहीं मिली। इसके बाद विभाग की ओर से भी कोई पहल नहीं की गई।
पुल की मरम्मत के लिए करीब दो करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया है। अभी शासन से मंजूरी नहीं मिल सकी है। बजट मिलते ही मरम्मत का काम शुरू करा दिया जाएगा। - एमएम निसार, मुख्य अभियंता, पीडब्लयूडी