फरीदपुर। फरीदपुर की कटरी में तिहरे हत्याकांड के बाद गांव रायपुरहंस एवं गोविंदपुर के किसानों की जमीन को दबंगों से छुड़ाने के लिए ग्रामीणों की सहमति से चकबंदी का प्रस्ताव पारित कर प्रस्ताव डीएम को भेजा गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन पर जमीन दबंगों से छुड़ाने के लिए अतिरिक्त प्रयास न करने का आरोप लगाया है। फरीदपुर थानाक्षेत्र के ग्राम रायपुरहंस के कई किसानों की जमीन दबंगों के कब्जे में है। नजदीकी गांव गोविंदपुर में हुए तिहरे हत्याकांड के बाद किसानों ने अपनी जमीन कब्जामुक्त कराने के लिए तहसील प्रशासन से लेकर डीएम तक से गुहार लगाई। डीएम द्वारा टीम गठित कर किसानों की जमीन की नापजोख के निर्देश दिए गए लेकिन तहसील प्रशासन करीब 15 दिन तक गांव में पहुंचकर केवल खानापूरी करता रहा। तर्क दिया गया कि चकबंदी के बिना गांव में पैमाइश संभव नहीं है। वहीं किसानों से यह भी कहा गया कि उन्हें एसडीएम कोर्ट में तूदाबंदी के मुकदमे दायर करने के बाद ही निजी जमीन दिलवाई जाएगी। गांव के संबंधित किसान जमीन दबंगों से छुड़वाने के लिए तूदाबंदी का मुकदमा करें। हाल ही में गांव में चकबंदी का प्रस्ताव पारित कराया गया है। तहसीलदार शेर बहादुर सिंह ने बताया कि गांव में चकबंदी कराने के लिए प्रस्ताव पारित कर जिलाधिकारी को भेजा गया है। आगे की कार्रवाई उन्हीं के निर्देश पर की जाएगी।
पूर्व अधिकारियों का मत, प्रशासन मन से काम करे तो कई विकल्प
फरीदपुर में एसडीएम रह चुके एक पीसीएस अधिकारी ने बताया कि तूदाबंदी के तहत किसानों की जमीन की पैमाइश होती है लेकिन जहां मामला विवाद का हो और तीन लोगों की हत्या हो चुकी हो, वहां प्रशासनिक अधिकार उपयोग करके टीम गठित कर पैमाइश की जाती है। तमाम ऐसे प्रकरण सामने आए थे जिसमें किसानों की निजी जमीन पैमाइश कर उन्हें मुहैया कराई गई थी। आज भी प्रशासनिक अधिकारी किसानों की निजी जमीन नापने के लिए लेखपाल एवं कानूनगो को ही भेजकर पैमाइश कराते हैं।
वहीं फरीदपुर में पहले तैनात रहे एक राजस्व निरीक्षक ने बताया कि सन 2012-13 में रामगंगा के किनारे बसे कादरगंज गांव की जमीन भी बाढ़ के बाद रामगंगा नदी के उस पार पहुंच गई थी। इस दौरान प्रशासन के आदेशानुसार राजस्व टीम ने किसानों की जमीन पैमाइश करके उन्हें दे दी। जिस जमीन के कारण विवाद हो जाए, उसमें प्रशासन को स्वत: संज्ञान लेकर नियमानुसार जमीन छुड़वाने का काम करना चाहिए।