जानकार बताते हैं कि खुद पटाखे बनाने पर इसकी लागत और कम आती है। सामान्य तौर पर बिकने वाले पटाखों से इतना भयानक हादसा मुमकिन नहीं है। इसलिए बारूद के सैंपल को जांच के लिए भेजा गया है। बारूद में अमोनियम नाइट्रेट के इस्तेमाल की पुष्टि होने पर और बड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
पटाखा दुकानों में खामी मिलने पर नोटिस जारी
कल्याणपुर में धमाका होने के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर शुक्रवार को एसडीएम गोविंद मौर्य ने पुलिस बल के साथ पटाखा दुकानों की जांच की। बताया कि बड़ा बाइपास दीदार पट्टी स्थित पंजीकृत पटाखा प्रतिष्ठान भसीन ट्रेडर्स में छिटपुट खामियां मिलीं। इस पर संचालक को नोटिस देकर 48 घंटे में व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। अगर व्यवस्था ठीक नहीं होगी तो संचालन बंद करा दिया जाएगा।
ब्रांडेंड आइटम पर बचत कम
धंधे के जानकार बताते हैं कि ब्रांडेड कंपनी की आतिशबाजी फैक्टरी से निकलती है तो प्रिंट रेट के हिसाब से तीस फीसदी मुनाफे की ही गुंजाइश रहती है। इसमें थोक विक्रेताओं से लेकर माल फुटकर में आने तक दस से पंद्रह फीसदी मुनाफा गली-मोहल्ले के विक्रेताओं को मिल पाता है। जबकि, इस तरह घर में बनाई गई आतिशबाजी में मुनाफे की गुंजाइश पांच गुना तक हो सकती है। पचास रुपये में बिकने वाले पटाखे की लागत दस से पंद्रह रुपये ही होती है। ऐसे पटाखों की बिक्री करने और कारीगरों को माल देने की व्यापारियों में होड़ रहती है।
सभी आरोपियों की होगी गिरफ्तारी
एसपी उत्तरी मुकेश चंद्र मिश्रा ने बताया कि मोटे मुनाफे के चक्कर में आरोपी घरों में आतिशबाजी बना रहे थे। आरोपियों की तलाश में चार टीमें लगाई गई हैं। अस्पताल में भर्ती आरोपी भी निगरानी में है। सभी की गिरफ्तारी की जाएगी।