बरेली। इलाज के लिए तीन सौ बेड अस्पताल पहुंचे मरीजों का सामना खाली पड़े पर्चा काउंटर व दवा काउंटर से हुआ। काफी देर कतार में लगने के बावजूद कोई स्टाफ नहीं पहुंचा तो उनका सब्र का बांध टूट गया। वहां जमकर हंगामा हुआ। मामला हाथापाई तक पहुंचता, इससे पहले सीएमएस ने उन्हें समझाकर शांत कराया।
कोरोना महामारी के दौरान तीन सौ बेड अस्पताल में आउटसोर्सिंग के जरिये 52 कर्मी रखे गए थे। बुधवार को उनकी संबद्धता समाप्त हो गई। इसलिए बृहस्पतिवार को पर्चा बनाने, दवा वितरण, पैथोलॉजी में जांचें, सफाई आदि कार्य प्रभावित रहे। सुबह ओपीडी खुली तो तीमारदारों के साथ मरीज पहुंचे। पर्चा बनवाने के लिए काउंटर पर कतार लगाकर खड़े हो गए। घंटेभर तक कोई पर्चा बनाने नहीं पहुंचा। उन्होंने मौजूद फार्मासिस्ट से पूछताछ की तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इससे उनका पारा चढ़ गया। आक्रोशित मरीजों व तीमारदारों ने जमकर हंगामा किया। मौके पर पहुंचे सीएमएस डॉ. इंतजार हुसैन ने बताया कि स्टाफ की कमी है। लिहाजा, पर्चा बनाने में अड़चन है। मामला सीएमओ तक पहुंचा तो तीन स्टाफ नर्स और चार सफाईकर्मी तत्काल भेजे गए। इसके बाद मरीजों का पर्चा बना और इलाज शुरू हुआ। ब्यूरो
आउटसोर्स कर्मियों के हटने के बाद स्टाफ की कमी हो गई थी। सेवाओं में देरी होने पर हंगामे की सूचना मिली। तत्काल वहां स्टाफ तैनात कर दिया गया है। अब कोई समस्या नहीं है। - डॉ. विश्राम सिंह, सीएमओ