डॉ. यासीन उस्मानी। संवाद
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बदायूं। उप्र उर्दू अकादमी के पूर्व चेयरमैन व सपा अल्पसंख्यक सभा के निवर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना यासीन अली उस्मानी ने कहाकि मुसलमानों के लिए तालीम सबसे अहम जरूरत है। मुस्लिम वर्ग को पेशा आधारित तालीम न मिलने से दूसरी बड़ी समस्या बेरोजगारी की बनती है। सहसवान वैसवाड़ा इलाके के हजारों मुस्लिम युवक आज दिल्ली व दूसरे प्रदेशों में काम कर रहे हैं। अगर उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलता तो परदेश जाने की जरूरत नहीं पड़ती। अस्सी फीसदी तबका गरीबी से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि सियासतदां सब जानबूझकर अनजान बनते हैं। सरकार जिसकी भी बने, मुसलमानों की आर्थिक स्थिति को बेहतर करने का प्रयास होना ही चाहिए। आधुनिक शिक्षा खासकर व्यावसायिक शिक्षा की व्यवस्था हो जिससे रोजगार का रास्ता बन सके। हिंदू हमारे भाई हैं। मुसलमानों की देशभक्ति पर भी किसी को शक नहीं है। बस जाति धर्म के आधार पर जिम्मेदार लोग भेदभाव न करें तो देश को अब्दुल हमीद और कलाम मिलते रहेंगे। ब्यूरो