फरीदपुर (बरेली)। कस्बे के मोहल्ला फर्रखपुर में आग से पांच लोगों की मौत के मामले में पुलिस अपनी बुनी कहानी में ही उलझ गई है। कमरे के दरवाजे पर बाहर से ताला किसने और क्यों लगाया? इस अहम सवाल का जवाब न तो पुलिस दे पा रही है, न ही परिजन। सोमवार को घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने कमरे को अंदर से बंद करने का प्रयास किया पर सफलता नहीं मिली। ताला लगाने के बाद दरवाजे को खोलने का प्रयास किया तो वह खुला भी नहीं। ऐसे में पुलिस का हादसे का दावा कमजोर पड़ गया।
परिजनों को भी हत्या का यकीन है। अजय की बहन शिवानी, मकान मालिक राजकुमारी, अजय के छोटे भाई की पत्नी अंशुल पुलिस से चीख-चीखकर कह रही थीं कि अजय व उसके परिवार की मौत हादसे में नहीं हुई। हत्या ही की गई है। कहा कि कमरे के दरवाजे पर लगा ताला बाहर से ही गेट बंद कर लगाया जा सकता है, अंदर से यह किसी हाल में संभव नहीं है।
उन्होंने पुलिस से मांग की कि वह हादसा समझकर नहीं, हत्या की तरह जांच करे। आरोप लगाया कि पुलिस घटना को हादसा बता कर अपराधियों का मनोबल बढ़ा रही है। पुलिस सारे पहलुओं को दरकिनार कर केवल हादसा मान रही है। परिवार ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर भी सवाल उठाया। इसके अलावा सवाल और भी हैं, पर बंद दरवाजे का राज खुले तो इन पांच मौतों के रहस्य से भी पर्दा उठ जाएगा।
ससुर को अजय के करीबियों पर शक, बोले- एक चाबी साथ ले गए होंगे
कहा- मुआवजे के बहाने हत्या का राज छिपाने की कोशिश कर रही पुलिस
फरीदपुर। अजय के ससुर चंद्रसेन ने आरोप लगाया कि पुलिस हत्या का राज छिपाने के लिए इसे हादसा बता रही है। सरकारी सहायता का प्रलोभन देकर मामले को दबाना चाहती है। उन्होंने अजय के करीबियों पर ही हत्या का शक जताया। कहा कि मिलने वाले लोगों को ही घर की सारी गतिविधियां पता थीं। ताले की कितनी चाबियां हैं और वे कहां रहती हैं, यह भी जानकारी रही होगी। इसी का फायदा उठाते हुए तीन-चार लोग घर में पहुंचे होंगे और उन्होंने अजय के साथ खाया-पीया होगा। पूरे परिवार को किसी तरह अचेत करके मोटरसाइकिलों से पेट्रोल निकालकर उनको जला दिया होगा। जलने के दौरान पांचों सदस्यों में से कोई भी खुद को बचाने के लिए उठकर भाग भी नहीं सका। हर ताले की तीन चाबियां होती हैं। हो सकता है कि आरोपियों ने गुच्छे से एक चाबी निकालकर बाहर से ताला लगा दिया हो। हत्या को हादसे का रूप देने के लिए ब्लोअर को सोफे के पास रख दिया होगा। आरोपी दीवार के सहारे छत पर चढ़कर फरार हो गए होंगे। चंद्रसेन ने बताया कि अजय की बेटी दिव्यांका भले ही छह वर्ष की थी, लेकिन बहुत होशियार थी। एक बार किसी व्यक्ति को देख लेती तो उसे कहीं भी पहचान लेती थी। इसलिए आरोपियों ने खुद के पहचाने जाने की आशंका में बच्चों को भी मौत के घाट उतार दिया होगा। संवाद
बड़ा सवाल : घर में खड़ी बाइकों के पेट्रोल पाइप किसने और क्यों काटे
फरीदपुर। घर में खड़ी तीनों बाइकों के पेट्रोल पाइप किसने और किस उद्देश्य से काटे, इसका किसी के पास कोई जवाब नहीं है। पुलिस ने भी इस सवाल पर चुप्पी साध रखी है। परिवारवालों के अनुसार ये तीनों बाइकें अजय के घर में रोज आती-जाती थीं और ऐसा भी नहीं है कि वे काफी समय से घर में खड़ी रही हों। रोज आने-जाने वाली बाइकों की पेट्रोल की टंकी खाली कैसे हो सकती है, अभी तक यह सवाल भी अनुत्तरित है। परिजनों ने यह मामला उठाया तो पुलिस ने इसे नकार दिया। संवाद
इन सवालों के नहीं मिले जवाब
- कमरा बंद कर बाहर से ताला किसने और क्यों डाला?
- आग लगने के दौरान किसी ने बिस्तर से उठने की कोशिश क्यों नहीं की?
- अगर परिजनों को नशीला पदार्थ दिया गया या फिर हत्या के बाद शव बिस्तर पर रखकर आग लगाई गई तो ये बातें पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्यों नहीं आईं?
- बाहर से अगर कोई व्यक्ति घर में आया था तो उसे किसी ने आते-जाते देखा क्यों नहीं?
- आग से कमरे में रखा बाकी सामान क्यों नहीं जला?
- अगर बाइकों से पेट्रोल लेकर उसे डालकर शव जलाए गए तो घर से पेट्रोल की दुर्गंध क्यों नहीं आई?
भरवारी स्थित कौशाम्बी प्रेसीडेंसी स्कूल एंड कॉलेज भरवारी में आयोजित परीक्षा पर चर्चा में मौजूद
भरवारी स्थित कौशाम्बी प्रेसीडेंसी स्कूल एंड कॉलेज भरवारी में आयोजित परीक्षा पर चर्चा में मौजूद
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