पुलिस ने बताया कि हरि प्रसाद व सुरेश काशी राव निवासी अमरावती महाराष्ट्र से चार जनवरी से अपने साथी राजेंद्र के मार्फत सलूजा होटल में कमरा लेकर रुके थे। होटल पहुंचने से पहले ही कार की नंबर प्लेट बदलकर फर्जी नंबर प्लेट लगा ली थी। इसके बाद राजेंद्र के बताने पर राजापुर मंडी के अंदर जिला सहकारी बैंक जाकर रेकी की थी। सुरेश उमक ने अपने अन्य साथी तुषार उर्फ ऋषभ को बुलाया, जो उसी होटल में रुका और उसके जरिये शहर की दुकान से गैस कटर खरीदा और चोरी को अंजाम दिया।
अभियुक्त बोले- 32 लाख में 16 लाख ही ला सके, शेष नकदी जल गई
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि बैंक से कुल सोलह लाख रुपये मिले थे, जबकि लॉकर काटते समय गैस की आग से बाकी की नकदी जल गई थी। सुरेश उमक ने बताया कि उसे बंटवारे में छह लाख रुपये मिले थे, जिसमें साथी हरिप्रसाद को एक लाख व तुषार को पचास हजार रुपये दिये। बाकी का पैसा राजेंद्र के पास था। बताया कि जली हुई नकदी व दो ऑक्सीजन सिलिंडर नदी में फेंक दिये थे।
राजेंद्र एलपीजी सिलिंडर को अपने साथ ले गया था। तीनों आरोपियों से बरामद नम्बर प्लेटों के बारे मे पूछा गया तो तीनों ने एक साथ बताया कि, जब हम लोग चोरी करने के लिये जाते हैं तो कार की पहचान छुपाने के लिये फर्जी नंबर प्लेट लगा लेते हैं, जिसे पकड़ में न आएं। कार के कागज आरोपी नहीं दिखा सके। गाड़ी की नंबर प्लेट कूटरचित थी।
गिरोह के सरगना पर महाराष्ट्र में 24 मुकदमे दर्ज
गिरोह के मुख्य सरगना सुरेश उमक के खिलाफ महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विभिन्न जनपदों के थानों में 24 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। आरोपी विभिन्न शहरों में नाम बदलकर रहता था। पुलिस से पहचान छुपाने के लिये 2010 में उसने प्लास्टिक सर्जरी करई थी। सुरेश उमक को कई राज्यों की पुलिस बैंक चोरी के अपराध में तलाश कर रही है। शातिर अपराधी द्वारा उत्तर प्रदेश के कई जिलों मे रेकी करके जिला सहकारी बैंक को टारगेट करने की योजना बनाई। एसपी ने बताया कि चोरी का खुलासा करने वाली पुलिस टीम को 25 हजार रुपये का इनाम दिया जाएगा।