उन्होंने कहा कि अतीक और अशरफ की हत्या से पहले मुख्यमंत्री ने सदन में घोषणा की थी कि वह इनको मिट्टी में मिला देंगे। इस लिहाज से उन्हें भी इस घटनाक्रम के बारे में कुछ पता रहा होगा। ऐसे में मुकदमे में उन्हें भी आरोपी बनाया जाना चाहिए और तब तक मुख्यमंत्री को नैतिक आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए।
कहा कि वह अतीक और अशरफ को निजी तौर पर नहीं जानते नहीं हैं लेकिन इतना जरूर जानते हैं शाइस्ता को मीडिया फरार दिखा रहा है और पुलिस सरगर्मी से तलाश कर रही है जो गलत है। किसी व्यक्ति की मौत के बाद मुस्लिम धर्म की महिलाएं कब्रिस्तान में नहीं जाती हैं बल्कि करीब चार महीने तक एकांत ने रहती हैं।
शाइस्ता और अशरफ की पत्नी जेनब भी इदत्त में ही होंगी। पुलिस उन्हें पकड़ भी ले तो उसी घर में इतने वक्त तक रहने दे और बेपर्दा न करे। मौलाना ने कई आरोप लगाए और हेमंत करकरे की मौत पर भी सवाल उठाया। कहा कि उनकी साजिशन हत्या की गई थी। मीडिया के तीखे सवालों पर मौलाना ने कहा कि आपको अपनी स्टोरी के लिए एक विलेन चाहिए और आप इसके लिए मुझे खोज लेते हो लेकिन मैं विलेन नहीं हूं।