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Bareilly News: सकलैन मियां के कुल की रस्म के साथ उर्स का समापन, हजारों जायरीन उमड़े

Thu, 10 Oct 2024 06:37 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

बरेली में कुल की रस्म के साथ बुधवार को उर्स-ए-सकलैनी मुकम्मल हुआ। इसमें सकलैनियों का हुजूम उमड़ा। उर्स में मुल्क व अवाम की खुशहाली के लिए दुआ की गई।
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उर्स में उमड़े जायरीन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली में सकलैन मियां के कुल के साथ बुधवार को उर्स-ए-सकलैनी मुकम्मल हुआ। इसमें सकलैनियों का हुजूम उमड़ा। अकीदत का इजहार करते हुए मुल्क व अवाम की खुशहाली के लिए दुआ की गई।  शाहबाद स्थित दरगाह शाह शराफत मियां के आस्ताने पर बुधवार सुबह कुरान ख्वानी के बाद जायरीन हाजिरी लगाते रहे। खानकाह के मेहमानखाने में उलमा की तकरीर हुई। 11 बजे कुल की रस्म अदा की गई। सज्जादानशीन शाह मोहम्मद गाजी मियां ने कुल की फातिहा पढ़ी और दुआ की। इस दौरान सादकैन सकलैनी, मौलाना असलम मियां वामिकी, अल्लामा आबिद सकलैनी, अल्लामा शाहिद शेख, मौलाना रिफाकत सकलैनी सहित अन्य लोग मौजूद रहे। 

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जगह-जगह लगा जाम
उर्स में जायरीन के उमड़ने की वजह से शहर में जगह-जगह जाम लग गया। कोहाड़ापीर, नैनीताल रोड, कुतुबखाना, जाटवपुरा चौराहा और बांस मंडी रोड पर घंटों जाम लगा रहा। दरगाह की तंग गलियों में जायरीन की भीड़ से तमाम लोग दबे-कुचले। कई बार भगदड़ जैसे स्थिति भी बनी। कई बुजुर्ग और बच्चों को वालेंटियर्स ने बचाया। 

तालीम पर रहा जोर
उर्स के दौरान मुस्लिमों की शिक्षा पर जोर दिया गया। कुल की रस्म से पहले अल्लामा शाहिद शेख सकलैनी ने एलान किया कि जल्द ही खानकाह की ओर से यूनिवर्सिटी खोली जाएगी। उन्होंने बताया कि आस्ताने से जुड़ीं दो संस्थाएं ‘हजरत शाह सकलैन एकेडमी ऑफ इंडिया’ और ‘दार उस सकलैन फाउंडेशन’ कायम हैं। सकलैन एकेडमी देशभर में ज़रूरतमंदों की मदद जैसे बेटियों की शादी, बीमार लोगों का इलाज आदि कराती है। 

‘दार उस सकलैन फाउंडेशन’ की ओर से यूनिवर्सिटी खोली जाएगी, जिसमें बच्चों-बच्चियों को इंजीनियरिंग, मेडिकल सहित तमाम प्रकार की दुनियावी और दीनी तालीम दी जाएगी। इसमें अमीर-गरीब सभी बच्चों को समान रूप से उच्च शिक्षा दी जाएगी। खुसूसी आलिम अल्लामा मुख्तार अशरफ ने पीरो मुरशिद सकलैन मियां हुजूर की जिंदगी पर रोशनी डाली। संचालन मौलाना प्रोफेसर महमूद उल हसन ने किया। 
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पुलिस-प्रशासन से  नहीं मिला सहयोग  
दरगाह के प्रवक्ता मोहम्मद हमजा सकलैनी ने कहा कि उर्स की अनुमति न होने की वजह से काफी दिक्कतें हुईं। उर्स लोगों की आस्था का मामला है, इसमें शामिल होने से किसी को रोका नहीं जा सकता। हमने किसी जायरीन को दावत नहीं दी। पीर से आस्था रखने वाले लोग खुद ही आए हैं। पुलिस-प्रशासन का हमें अपेक्षित सहयोग नहीं मिल सका। जायरीन के वाहनों के चालान भी किए गए। हमने यह उर्स बड़े दबाव में किया है। इसके बाद भी हम पुलिस-प्रशासन का शुक्रिया अदा करते हैं कि उर्स मुकम्मल हो गया।

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