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Bareilly News: आदिशक्ति की आराधना के लिए जगह-जगह सजे पंडाल, आज विराजेंगी मातारानी

Wed, 09 Oct 2024 11:23 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

बरेली में बंगाली समाज के लोगों ने करीब 100 वर्ष पूर्व दुर्गा पूजा की शुरुआत की थी। अब तकरीबन नौ स्थानों पर माता के पंडाल लगाए जाते हैं। इस बार भी कई जगह पंडाल लगाए गए हैं। 
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दुर्गा माता की मूर्ति को अंतिम रूप देते मूर्तिकार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली में शारदीय नवरात्र का पर्व पर शहर बंगाली संस्कृति में रंगने लगा है। दुर्गा पूजा समितियों ने भी तैयारियां तेज कर दी हैं। शक्ति की अराधना के लिए जगह-जगह मातारानी के पंडाल भी सज गए हैं। रंग-बिरंगी झालरों और फूलों से पंडालों को मनमोहक रूप दिया गया है। षष्ठी तिथि पर विशेष पूजा-अर्चना के बीच मातारानी पंडालों में विराजमान होंगी।   

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शहर में बंगाली समाज के लोगों ने करीब 100 वर्ष पूर्व दुर्गा पूजा की शुरुआत की थी। अब तकरीबन नौ स्थानों पर माता के पंडाल लगाए जाते हैं। इनमें रामपुर गार्डन स्थित दुर्गाबाड़ी, रोड नंबर सात इज्जतनगर स्थित कालीबाड़ी, दादू काली मंदिर इज्जतनगर, एयरफोर्स स्टेशन, कुदेशिया फाटक स्थित संगम पैलेस, रोड नंबर चार स्थित एनईआर, मिनी बाइपास, बीआई बाजार कैंट और जंक्शन स्थित रेलवे मनोरंजन सदन शामिल हैं। 

महिला सुरक्षा का संदेश देने के लिए थीम में किया बदलाव 
बंगाली कल्चरल एवं वेलफेयर सोसाइटी के मीडिया प्रभारी ध्रुव चटर्जी ने बताया कि वर्ष 1992 में उत्तर रेलवे के मनोरंजन सदन में प्रो. आरएन मुखर्जी, मनोज राय, श्यामल डे, डॉ. चक्रवती, अजीत चटर्जी, प्रवीर बंधुराय, दिलीप चटर्जी, डॉ. अमित तरफदार, डाॅ. पीबी राय आदि ने पूजा शुरू कराई थी। 

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इस वर्ष दुर्गा पूजा महोत्सव नौ अक्तूबर से 13 अक्तूबर तक आयोजित किया जाएगा। जिसमें सप्तमी, अष्टमी, एवं नवमी के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ भंडारे का आयोजन भी होगा।  महिला अपराधों को ध्यान में रखते हुए इस बार नारी सुरक्षा की थीम रखी गई है। पूजा पंडाल को सजाने के लिए कोलकाता से कारीगर बुलाए गए हैं। 

धुनुची नृत्य आकर्षण का केंद्र
रामपुर बाग स्थित दुर्गाबाड़ी पंडाल की शुरुआत वर्ष 1960 में डॉ. एससी चटर्जी, डॉ. पीएम गुहा, पीसी गांगुली, पीएन राय के नेतृत्व में हुई। यहां धूमधाम से पांच दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इस वर्ष इसका आगाज नौ अक्तूबर से होगा। 

इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम भी करवाए जाते हैं। धुनुची नृत्य आकर्षण का केंद्र रहता है। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए माता की मूर्ति मिट्टी से बनवाई जाती है। महापर्व को और विशेष बनाने के लिए पश्चिम बंगाल से ढाक वादकों की मंडली बुलवाई गई है।  
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पालकी पर होगा मातारानी का आगमन
इज्जतनगर रोड नंबर चार स्थित दुर्गा पूजा पंडाल की स्थापना वर्ष 1956 में की गई थी। नौ अक्तूबर को माता पालकी पर विराजमान होकर आएंगी। पांच दिवसीय कार्यक्रम में 10 अक्तूबर को महासप्तमी पूजा, भंडारे के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाएगा। 11 अक्तूबर को महाअष्टमी पूजा होगी। 12 अक्तूबर को नवमी पूजा, भंडारा और प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। 13 अक्तूबर को प्रतिमा विसर्जन के साथ महोत्सव का विश्राम होगा।
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