बरेली। बाॅम्बे हाईकोर्ट में रबर फैक्टरी की भूमि पर मालिकाना हक के संबंध में चल रहे प्रकरण की चार जुलाई को सुनवाई होनी थी, लेकिन नामित महाधिवक्ता और अधिवक्ता पैरवी नहीं कर सके। सुनवाई की तिथि आगे टल गई। मामले पर फैक्टरी कर्मचारियों ने कड़ी आपत्ति जताई है।
एसएंडसी कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारियों का कहना है कि 15 जुलाई 1999 को सिंथेटिक एंड केमिकल्स लिमिटेड के मालिकों ने कारखाने में कार्यरत कर्मचारियों को सवेतन अवकाश घोषित कर दिया था। तब से अब तक फैक्टरी बंद पड़ी है। बगैर कर्मचारियों का भुगतान किए उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया। इधर, शासन और प्रशासन ने भी कोई कसर बाकी नहीं रखी। बेशकीमती जमीन पर मालिकाना हक हासिल करने के लिए अब शासन का रवैया सुस्त है। इसलिए जल्द यूनियन के पदाधिकारी वनमंत्री डाॅ. अरुण कुमार के साथ प्रमुख सचिव से मिलेंगे।
बताया कि शासन की सुस्ती भरे रवैये का प्रमाण है कि बॉम्बे हाईकोर्ट में केस की पैरवी कर रहे अधिवक्ता और महाअधिवक्ता को शासन ने अभी तक पैरवी जारी रखने का पत्र नहीं भेजा। लिहाजा, चार जुलाई को सुनवाई की तिथि पर प्रदेश सरकार के अधिवक्ता पैरवी नहीं कर सके।
ऑफिशियल लिक्विडेटर वेतन
भुगतान पर जता दी है सहमति
महामंत्री अशोक कुमार मिश्रा के मुताबिक जब तक रबर फैक्टरी जमीन पर मालिकाना हक उत्तर प्रदेश सरकार को नहीं मिलेगा तब तक कर्मियों के वैधानिक देय भुगतान भी नहीं होगा। हालांकि, प्रकरण पर पूर्व में बॉम्बे हाईकोर्ट से नियुक्त ऑफिशियल लिक्विडेटर कर्मचारियों के क्लेमों पर भुगतान की सहमति दे चुके हैं। इससे संंबंधित दस्तावेज भी सौंपे हैं। भुगतान के इंतजार में अब तक छह सौ कर्मियों की मौत हो चुकी है।