गुलड़िया। सिरौली के गांव कठोती में झगड़े की सूचना पर पहुंची पुलिस को घर में घेरकर दबंगों ने हमला कर दिया। सिर पर लाठी लगने से चौकी इंचार्ज लहूलुहान हो गए तो पुलिसकर्मियों में भगदड़ मच गई। बाद में घर से निकले ग्रामीणों की मदद से पुलिस ने चार हमलावरों को पकड़ लिया। चौकी इंचार्ज की ओर से जानलेवा हमले और बलवे की रिपोर्ट दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया है।
सिरौली के गांव कठोती में रहने वाले प्रकाश ने सोमवार रात करीब 11 बजे बड़ागांव चौकी इंचार्ज सहेंद्र मलिक को सूचना देकर अपने विरोधियों के हाथों हत्या की आशंका जताई थी। इस पर चौकी प्रभारी करीब दर्जन भर पुलिसकर्मियों को लेकर कठोती पहुंचे। प्रकाश से पूछताछ के बाद उनके पड़ोसी छेदालाल, अमर सिंह, हेमराज, लेखराज और प्रेम शंकर के घर में दबिश दी। पुलिस के घर में घुसते ही आरोपियों ने उन्हें घेर लिया और पीटना शुरू कर दिया।
चौकी इंचार्ज पर आरोपियों ने ताबड़तोड़ लाठी बरसानी शुरू कर दीं। सिर पर लाठी लगने से वह लहूलुहान होकर गिर गए। चौकी इंचार्ज को खून में लथपथ देख और पुलिसकर्मियों में भगदड़ मच गई। इस बीच चीखपुकार मचने पर इकट्ठे हुए ग्रामीणों ने हमलावरों को ललकारा। कुछ पुलिसकर्मी लहूलुहान चौकी इंचार्ज को निकालकर बाहर लाए। इसके बाद ग्रामीणों की ही मदद से पुलिस ने घेराबंदी कर चार हमलावरों को दबोच लिया।
एसएसपी के निर्देश पर घायल चौकी इंचार्ज को बरेली के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। चौकी इंचार्ज की तहरीर पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। पकड़े गए आरोपी छेदालाल, प्रेम शंकर, अमर सिंह और हेमराज को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया। जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
जहन में ताजा हुई बिकरू कांड
में पुलिस लापरवही की यादें
कठोती गांव में सोमवार रात हुई घटना ने लोगों के जहन में दो जुलाई 2020 को हुए कानपुर के बिकरूकांड की याद ताजा हो गई। सोमवार रात कठोती गांव में हुई घटना पुलिस कर्मियों की लापरवाही का नतीजा रही। दरअसल पुलिस पर हमला करने वालों की दबंगई से पूरा गांव परेशान है। महीने भर पहले इन लोगों ने मामूली कहासुनी पर ही गांव के ओम प्रकाश, बेला वती और हरदोई को पीटकर लहूलुहान कर दिया था। महिलाओं को भी गलियों में घसीटते हुए पीटा था। इसके बावजूद पुलिस ने एनसीआर लिखकर यह मामला निपटा दिया। एक महीने बाद मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर उसे धारा 308 में तरमीम किया गया लेकिन पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया। इसी केस में धारा बढ़ने से भड़के आरोपियों ने सोमवार रात फिर बड़ा बवाल करने की योजना बनाई थी।
ग्रामीण न बचाते तो जा सकती थी पुलिस वालों की जान
ग्रामीणों के मुताबिक गिरफ्तारी न होने से दबंगों के हौसले इतने बढ़ गए थे कि मोहल्ले में किसी को चैन से रहने नहीं दे रहे थे। सोमवार रात जब पुलिस दबिश देने पहुंची वे टीम पर टूट पड़े और बेरहमी से पुलिस वालों को मारने लगे। चीखपुकार मचाते हुए पुलिस वालों के भागने पर ग्रामीण इकट्ठा होकर पहुंचे। उन्होंने पुलिस कर्मियों को बचाया। ग्रामीणों के मुताबिक हमलावर इस कदर गुस्से में थे कि यदि वे न पहुंचते तो कई पुलिस वालों की जान ले लेते।