बरेली। वर्षों बाद फरवरी से ही भीषण गर्मी का प्रकोप सह रही फसलों का चक्र प्रभावित हो रहा है। 20 दिन पहले ही आम के पेड़ों में बौर आ गए हैं। गेहूं, दलहन, तिलहन की फसल में दाने भरने लगे हैं। साथ ही, आम के बौर पर मैंगो हॉपर व अन्य कीटों का प्रकोप भी बढ़ने लगा है। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को फसल सुरक्षित करने के लिए परामर्श दिया है।
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रंजीत सिंह के मुताबिक दिन व रात के तापमान में बढ़ोतरी जारी है। अबकी साल 12 फरवरी से ही तापमान में रिकॉर्ड बढ़त दर्ज होने लगी थी। फरवरी के आखिरी तक तापमान 30 डिग्री तक जा पहुंचा था, जबकि आमतौर पर इस दौरान तापमान 22 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच तक ही दर्ज होता रहा। इससे गेहूं, सरसों, मसूर, दलहन, तिलहन की बढ़वार थमी और दाने भरने का सिलसिला शुरू हो गया। खीरा, अगैती तोरई, लौकी में फूल जल्दी आने लगे हैं, क्योंकि इनकी बेल की वृद्धि थम गई है।
फल जल्दी आने से कीटों का प्रकोप शुरू
डॉ. सिंह के मुताबिक रात के तापमान की अधिकता से माहू कीट का प्रकोप बढ़ा है। तुरंत उपाय नहीं किए गए तो गेहूं, सरसों की फसल प्रभावित होने की आशंका है। पत्ता गोभी, फूलगोभी आदि पर भी असर दिखने लगा है। किसानों को सब्जी की फसल में पानी लगाने का सुझाव दिया है।
पछुआ चलने पर बढ़ेगी मुसीबत
बताया कि अभी हवा अनुकूल होने से गर्मी के बावजूद फसलों पर खास दुष्प्रभाव नहीं हुआ है। पछुआ चलेगी तो फसलों को काफी नुकसान होने की आशंका है। फसलों की बढ़वार होगी पर दाना कम भरेगा। फसलों में सड़न की संभावना ज्यादा रहेगी। दिक्कत होने पर किसान कृषि विज्ञान केंद्र पर संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने किसानों से पराली न जलाने की अपील भी की है।