बरेली। रोडवेज के टिकट के लिए ऑनलाइन भुगतान की सुविधा उत्साहवर्धक नहीं है। इलेक्ट्रानिक टिकट इंडीकेटर मशीन (ईटीआईएम) से टिकट जारी करके ऑनलाइन भुगतान लेने की शुरुआत तो हुई लेकिन सभी परिचालकों को प्रशिक्षण नहीं दिया गया। यही नहीं मानसिक रूप से भी तैयार नहीं किया गया। इससे पेमेंट स्वीकार करने से परिचालकों ने परहेज ही किया। नतीजा यह हुआ कि बसों में यात्रियों और परिचालकों में बहस भी हुई।
पुराना बस अड्डा में कुछ परिचालकों ने जब दिक्कतें बताईं तो अफसरों के दावों की कलई खुल गई। रुहेलखंड डिपो की बस संख्या यूपी 25 बीटी 2629 दिल्ली जा रही थी। परिचालक अजय पाल से जब यात्री रतन कुमार ने ऑनलाइन पेमेंट के लिए पूछा तो परिचालक का जवाब था मशीन तो मिल गई पर न कुछ बताया गया न कुछ समझाया गया। भुगतान में और उलझा दिया गया। रतनकुमार ने जोर दिया तो परिचालक, यात्री को लेकर बुकिंग कार्यालय पर गए जहां बुकिंग क्लर्क कलीम खान ने मशीन चलाने का तरीका बताया। इसी तरह बरेली डिपो की बस संख्या यूपी 77 एएन 2597 के परिचालक सलीम खां ने कहा कि मशीन उन्हें मिल गई है लेकिन प्रशिक्षण नहीं हुआ है। मोबाइल तो चला ही लेते हैं, एक दो दिन में मशीन भी चलाना सीख जाएंगे। परिचालक कपिलदेव शर्मा का कहना है कि मशीन तो चला लेते हैं लेकिन जब कनेक्टिविटी नहीं आई तो क्या करेंगे। मुझे कई परिचालकों ने बताया है कि कई यात्रियों के पैसे कट गए और परिचालक के खाते में नहीं आए। बरेली से दिल्ली जा रहे कपिल देव शर्मा से जब यात्री रेहान ने ऑनलाइन टिकट मांगा तो परिचालक ने कैश पर जोर दिया।
यह ईटीआईएम की नई व्यवस्था
रोडवेज की बसों में पे-टीएम, गूगल-पे और दूसरे माध्यम से बस में सवार यात्री टिकट लेकर ऑनलाइन भुगतान करने की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए ईटीआईएम दी गई है। बार कोड स्कैन करके भुगतान करना है। मशीन में सिम लगा है जो इंटरनेट से कनेक्ट है। मशीन एंड्रायड फोन की तरह संचालित होती है।
कोट
परिचालकों की संख्या 1200 से अधिक है। सबको एक-दो दिन में प्रशिक्षण नहीं दिया जा सकता। मशीन दी गई है। कुछ लोगों को प्रशिक्षण दिया गया है। कहीं कोई दिक्कत आ रही है तो परिचालक अपने स्टेशन इंचार्ज को बताए। यात्री सुविधा के लिए प्रत्येक बस में ऑनलाइन पेमेंट स्वीकार करने के निर्देश परिचालकों को दिए गए हैं।
दीपक चौधरी, क्षेत्रीय प्रबंधक
घाटे के मार्गों से हटेंगी ई-बसें, नए मार्ग तय करने के लिए सर्वेक्षण
शहर के लिए ई-बसें मिलीं है पर अफसर गांवों में दौड़ाकर ई-बस सेवा को घाटे में डुबा रहे हैं। अब अफसर चेत गए और घाटे वाले मार्गों से बसें हटाकर शहर के ऐसे मार्ग तलाशे जा रहे हैं जहां यात्री को सुविधा मिले। सिटी बस सर्विस को आमदनी हो। यात्री न मिलने की वजह से फतेहगंज पश्चिमी और रिठौरा मार्ग पर चल रहीं आठ से में से चार ई-बसें हटा लीं गईं। इन बसों को भी अब बरेली-फरीदपुर के बीच संचालित करके आमदनी बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। आने वाले कुछ दिनों में ई-बसों का मार्ग बदला जाएगा। इसके लिए सर्वेक्षण शुरू किया गया है। सिटी बस सर्विस के सीईओ दीपक चौधरी ने बताया कि 15 ई-बसों में 14 संचालित हैं। इन सभी बसों को यात्रियों की जरूरत के मार्ग पर चलाए जाने के लिए सर्वे चल रहा है। इसके बाद बोर्ड में प्रस्ताव पारित कराया जाएगा।