बछड़ा और पड्डा से निजात चाहते हैं पशुपालक
वैज्ञानिकों के मुताबिक बछड़े-पड्डे के जन्म से पशुपालकों को अनावश्यक खर्च उठाना पड़ता है। अब उनको बैल और सांड़ की जरूरत भी नहीं है। इससे वे निजात चाहते हैं। यह प्रोजेक्ट किसानों की आय बढ़ाने में सहायक साबित होगा।
फार्म में सफल रहा ट्रायल, अब फील्ड की तैयारी
आईवीआरआई के डेयरी फार्म में बीते दो साल से उन्नत नस्ल की बछिया-पड़िया के जन्म के लिए सेक्सॉटिक सीमेन से कृत्रिम गर्भाधान कराया गया। 300 गाय व भैंस पर हुए प्रयोग में सफलता मिली। अब एबीएस जेनेटिक के सहयोग से फील्ड ट्रायल की तैयारी है। प्रोजेक्ट का मार्गदर्शन संस्थान के निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त व संयुक्त निदेशक डॉ. रूपसी तिवारी करेंगी।