बरेली। नगर निगम के अधिकारी टेंडर-टेंडर खेलने में व्यस्त हैं। काम से किसी को कोई मतलब नहीं। आचार संहिता हटे हुए दस दिन से ज्यादा हो गए, लेकिन किसी वार्ड में नाली व सड़क का निर्माण शुरू नहीं हो सका। यह हाल तब है जबकि निगम के अधिकारी एक महीने से दावा कर रहे थे कि आचार संहिता हटते ही टेंडर कराकर काम शुरू करा दिए जाएंगे।
नगर निगम के 80 वार्डों में 24 करोड़ से सिर्फ नालियों व सड़कों के काम होने हैं। लोकसभा चुनाव से पहले ही पार्षदों से इसके लिए प्रस्ताव मांग लिए गए थे। कई के टेंडर भी हो गए थे पर वर्क ऑर्डर जारी नहीं हो पाए थे। इसके बाद आचार संहिता लगने से काम अटक गया। इस बीच नगर निगम के अधिकारी दावा करते रहे कि तैयारियां पूरी हैं। आचार संहिता हटते ही टेंडर कराकर काम शुरू करा दिए जाएंगे।
अब आचार संहिता को हटे हुए दस दिन से ज्यादा हो गया है। काम शुरू कराने से ज्यादा दिलचस्पी अधिकारी नए टेंडर कराने में दिखा रहे हैं। पार्षदों से 50 लाख रुपये के काम के लिए प्रस्ताव मांग लिए गए हैं। कुछेक वार्ड छोड़ दें तो पुराने 30 लाख रुपये के काम अभी शुरू नहीं हो सके हैं। अधिकारी चाहते तो अब तक टेंडर कराकर काम शुरू करा सकते थे। अब अफसरों को बहानेबाजी के लिए बरसात का इंतजार है।
वार्डों में शुरू नहीं हो सके निर्माण कार्य
शहर के सुभाषनगर, भूड़, कोहाड़ापीर, सिविल लाइंस, बिहारीपुर आदि मोहल्लों में नालियों व सड़कों की हालत बहुत खराब है। जगह-जगह सड़कें उधड़ी पड़ी हैं। नालियां तो अर्से से नहीं बनीं। सुभाषनगर पुलिया से गुरुद्वारे तक की सड़क पर इस कदर गड्ढे हो गए हैं कि चलना दूभर है। इलाके के लोगों को उम्मीद थी कि बरसात से पहले शायद यहां काम शुरू हो जाएगा, पर अब इसके आसार नहीं दिख रहे। बरसात में लोगों को जलभराव के साथ गड्ढों से होकर गुजरना होगा। गड्ढे इतने गहरे हैं कि वाहन चालकों का गिरना भी तय है। संवाद