बरेली। परिवहन निगम की शताब्दी व जनरथ एसी बसों को पर्याप्त यात्री नहीं मिल पा रहे। इस कारण बसें रद्द करनी पड़ रही हैं। शुक्रवार शाम को लखनऊ की शताब्दी बस को मात्र छह और रात में दिल्ली जाने वाली शताब्दी बस को महज तीन यात्री मिले। ऐसे में सेटेलाइट बस अड्डे पर दोनों ही बसों को रद्द कर दिया गया।
वहीं रद्द की गईं बसों में बैठी सवारियों को दूसरी जगहों से आ रही एसी बसों में बैठाकर गंतव्य की ओर रवाना किया गया। सवारियां न होने के कारण ऐसा आए दिन हो रहा है। पर्याप्त संख्या न होने पर यात्रियों को भी परेशानी होती है। बीते एक सप्ताह में सवारियां न होने के कारण लखनऊ जाने वाली चार एसी राजधानी व जनरथ बसें रद्द करना पड़ीं। एआरएम केके वाजपेई ने बताया कि 25 से कम सवारियां होने पर एसी बसों को नहीं भेजा जा रहा है। धीरे-धीरे मौसम में बदलाव हो रहा है, उम्मीद है कि जल्द बसों को पर्याप्त सवारियां मिलना शुरू हो जाएंगी।
नहीं निकलता डीजल का भी खर्चा
चालक दुर्गेश सिंह ने बताया कि एसी बस दिल्ली के एक फेरे में 112 से 120 लीटर डीजल खर्च होता है। एक तरफ से करीब पांच हजार रुपये का डीजल और दो-तीन हजार रुपये टोल में चले जाते हैं। ऐसे में 25 सवारियों से कम में औसत नहीं आता। दिल्ली का किराया 551 रुपये हैं। ऐसे में 25 सवारियां बैठने पर 13775 रुपये ही मिलते हैं। ऐसे में लौटा फेरी का डीजल का खर्च तक नहीं निकलता।