बरेली। मलेरिया, डेंगू के लिहाज से संवेदनशील जिले में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही भारी पड़ सकती है। मलेरिया के मरीजों का आंकड़ा 600 के पार पहुंच चुका है। डेंगू के आंकड़े भी बढ़ रहे हैं, लेकिन अब तक प्रभावित इलाकों में दवा का छिड़काव शुरू नहीं हो सका है। बताया जा रहा है कि अब तक शासन से अल्फा साइपरमेथ्रीन दवा की आपूर्ति ही नहीं की गई है। जिम्मेदारों का कहना है कि दवा मिलने पर ही गतिविधियां शुरू होंगी।
शासन और एंबेड संस्था के सर्वे में पता चला कि डाईक्लोरो डिफेनिल ट्राईक्लोरोइथेन (डीडीटी) का वार मच्छरों पर बेअसर है। बीते साल पायरेथ्रम छिड़काव की योजना बनी, पर मिट्टी का तेल उपलब्ध नहीं हो सका। अब नए सिंथेटिक अल्फा साइपरमेथ्रीन के प्रयोग की तैयारी है, पर यह दवा विभाग को नहीं मिल सकी है। जिला मलेरिया अधिकारी सत्येंद्र सिंह का कहना है कि संबंधित दवा के छिड़काव के लिए एक अलग तरह की मशीन का प्रयोग होता है।
दवा और उपकरण दोनों ही नहीं मिले हैं। जबकि, तीन माह पहले ही इसके प्रयोग के संबंध में प्रशिक्षण हो चुका है। उन्होंने अल्फा साइपरमेथ्रीन से मच्छरों की तादाद नियंत्रित होने की उम्मीद जताई है, क्योंकि इसके प्रति मच्छरों में प्रतिरोधी क्षमता विकसित नहीं है।
दवा मिली तो संवेदनशील गांवों में होगा छिड़काव
जिला मलेरिया अधिकारी के मुताबिक अल्फा साइपरमेथ्रिन का छिड़काव संवेदनशील गांवों से शुरू होगा। बीते साल पांच ब्लॉकों के 42 गांव अतिसंवेदनशील रहे। 58 संवेदनशील श्रेणी में थे। इन्हीं से शुरुआत होगी, ताकि रोग का प्रसार थमे और दवा की उपयोगिता साबित हो सके। बताया कि जिले में अब तक मलेरिया के 609 और डेंगू के 17 मरीज मिल चुके हैं।