बरेली। अधिक मुआवजे के लिए तैयार किए गए स्ट्रक्चरों के बदले 15 से 30 दिनों में ही भुगतान कर दिया गया, जबकि सामान्य प्रक्रिया में दो से तीन महीने तक लग जाते हैं। एनएचएआई की जांच में यह बात सामने आई है। मूल्यांकन से लेकर अनुमोदन तक हड़बड़ी में दस्तावेजों का उचित तरीके से सत्यापन नहीं किया गया। तभी एनएचएआई के तत्कालीन अधिकारी कार्रवाई के घेरे में आए और उन्हें निलंबन झेलना पड़ा। जांच रिपोर्ट के मुताबिक तत्कालीन अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत के बगैर यह घोटाला संभव नहीं है। ब्यूरो