पीलीभीत। देवोत्थान एकादशी के मौके पर भक्तों ने बाबा खाटू श्याम की भव्य रूप से निशान यात्रा निकाली गई।
यात्रा पुराना बीसलपुर बस स्टैंड स्थित द्वारिकाधीश मंदिर से यात्रा शुरू हुई। बाबा के सिंहासन के साथ यात्रा मंदिर से शुरू होकर गैस चौराहा से मुख्य बाजार होते हुए ड्रमंडगंज चौराहा पहुंची। वहां से मोतीराम चौराहा पहुंची। इसके बाद चौक बाजार होते हुए श्री खाटू श्याम मंदिर पहुंचकर संपन्न हो गई। यात्रा का रास्ते में कई जगह पुष्प वर्षाकर स्वागत किया गया। यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया। इसके अलावा श्याम मित्र मंडल की ओर से अमित अग्रवाल, पवन अग्रवाल, राजेश गोयल, आलोक चंद, बिरल अग्रवाल आदि शामिल रहे।
बीसलपुर। खाटू श्याम की निशान यात्रा धूमधाम से निकाली गई।
बड़ा स्थल मंदिर से शुरू हुई निशान यात्रा के साथ चल रहे रथ में खाटू श्याम की प्रतिमा आकर्षक ढंग से सजाई गई थी। बैंड बाजों के साथ निकाली गई यात्रा में चल रहे श्रद्धालुओं में काफी उत्साह था। पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में निकाली गई यात्रा में शामिल श्रद्धालु खाटू श्याम की आरती गाते हुए चल रहे थे। श्रद्धालुृओं ने रास्ते में जगह-जगह पुष्प वर्षाकर यात्रा का स्वागत किया। प्रमुख मार्गो से गुजरने के बाद यात्रा अग्रवाल सभा भवन में पहुंचकर समाप्त हुई।
यात्रा में नितिन पाठक, सागर गुप्ता, सुनील, शेखर, विकास, रामजी गुप्ता, सचिन, राधेमोहन गुप्ता,विपुल अग्रवाल आदि शामिल थे।
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गोमती उद्गम स्थल पर प्रज्ज्वलित किए 501 दीये
पीलीभीत। सामाजिक वानिकी विभाग की ओर से शुक्रवार शाम गोमती उद्गम स्थल पर 501 दीये प्रज्ज्वलित किए गए। इसके बाद यहां का नजारा बेहद सुंदर नजर आ रहा था। इसके बाद आरती हुई। आरती में माधोटांडा के अलावा आसपास के काफी संख्या में गोमती श्रद्धालु मौजूद रहे। पूरनपुर रेंजर कपिल कुमार टीम के साथ उद्गम स्थल पहुंचे और तैयारियों का जायजा लिया। संवाद
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धूूमधाम से मनाई गई देवोत्थान एकादशी
पीलीभीत। देवोत्थान एकादशी धूमधाम से मनाई गई। लोगों ने पूजा अर्चना के लिए गन्ने, सिंघाड़े, शकरकंद खरीदे।
कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवोत्थान अथवा देव प्रबोधिनी एकादशी कहते हैं। शुक्रवार को देवोत्थान एकादशी परंपरागत तरीके से मनाई गई। श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर भगवान विष्णु की उपासना कर उन्हें गन्ना, सिंघाड़ा व गुड़ का भोग लगाया। रात में भगवान नारायण के मंत्र का जप, राम चरित मानस व सुंदरकांड का पाठ किया।
मान्यता है कि आज के ही दिन विष्णु भगवान ने शाप से मुक्ति पाने के लिए सालिगराम अवतार के रूप में तुलसी से विवाह किया था। संवाद